मध्य प्रदेश में एक नए कोर्स को लेकर राजनीति गरमा गई है। विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन (सम्राट विक्रमादित्य यूनिवर्सिटी) जुलाई सत्र से “टेंपल मैनेजमेंट” कोर्स शुरू करने जा रही है।
इस कोर्स का उद्देश्य मंदिरों के संचालन को प्रोफेशनल बनाना बताया जा रहा है। इसमें मंदिर प्रशासन, भीड़ नियंत्रण, ट्रस्ट मैनेजमेंट, धार्मिक आयोजन, सुरक्षा और तीर्थ पर्यटन जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा और बड़े मंदिरों की व्यवस्था बेहतर होगी।
वहीं विपक्ष ने इस फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका आरोप है कि सरकार शिक्षा के जरिए धार्मिक एजेंडा आगे बढ़ा रही है और यह सेक्युलर व्यवस्था के खिलाफ है। कुछ नेताओं ने इसे सरकारी संसाधनों के गलत इस्तेमाल तक बता दिया।
सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि देश में हजारों बड़े मंदिर हैं, जहां प्रोफेशनल मैनेजमेंट की जरूरत है। धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है और इस कोर्स से स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा, न कि किसी धर्म विशेष का प्रचार।
उज्जैन जैसे धार्मिक शहर में महाकालेश्वर मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं, जहां भीड़ और व्यवस्थाओं को संभालना बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में प्रशिक्षित मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की मांग लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या “टेंपल मैनेजमेंट” रोजगार का नया मौका है या फिर सियासत का नया मुद्दा?

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