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इंदौर में ‘नोटिस राज’ या भ्रष्टाचार का खेल? अधिकारियों पर सीधे आरोप, रहवासियों का फूटा गुस्सा‘Notice Raj’ or a Game of Corruption in Indore? Direct Allegations Against Officials; Residents’ Anger Erupts.

 

इंदौर। शहर में फायर सेफ्टी के नाम पर चल रही ताबड़तोड़ कार्रवाई के बीच इंदौर नगर निगम के अधिकारियों पर गंभीर और सीधे आरोप लगने लगे हैं। रहवासियों का कहना है कि “नोटिस” अब सुरक्षा का नहीं, बल्कि चयनात्मक कार्रवाई और भ्रष्टाचार का औजार बन गया है।


कमिश्नर तक पहुंची शिकायत, फिर भी खामोशी

स्थानीय नागरिकों ने तीन महीने पहले ही निगमायुक्त क्षितिज सिंघल को लिखित शिकायत सौंपकर भंवर कुआं रोड और बिलावली क्षेत्र में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और सड़क कब्जों की जानकारी दी थी। आरोप है कि शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

झोन 13 और 19 के अधिकारी कटघरे में

रहवासियों ने सीधे तौर पर झोन 13 (बिलावली) और झोन 19 के भवन अधिकारियों (B.O.) और भवन निरीक्षकों (B.I.) पर आरोप लगाया है कि वे अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर “आंख मूंदकर” बैठे हैं।

आरोप यह भी है कि:

मल्टी के असली मालिकों को बचाने के लिए अलग-अलग संचालकों को नोटिस थमाए जा रहे हैं

पैसे लेकर फुटपाथों पर कब्जा करने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है

जिन इमारतों में पार्किंग नहीं है, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं

भंवर कुआं रोड पर खुला खेल

शहर के व्यस्त इलाके भंवर कुआं रोड पर हालात सबसे ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं। यहां:

आईसीआईसीआई बैंक की पार्किंग तक पर अवैध दुकानें खड़ी कर दी गईं

कैफे और अन्य प्रतिष्ठान सड़क पर कब्जा कर रात तक गतिविधियां चला रहे हैं

एक बड़े फूड चेन आउटलेट द्वारा सड़क पर जनरेटर रखकर यातायात बाधित किया जा रहा है

लेकिन, आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं।

“ठेले वालों पर सख्ती, बड़े रसूखदार सुरक्षित”

स्थानीय लोगों का कहना है कि निगम की प्राथमिकता केवल छोटे ठेले और गरीब दुकानदारों पर कार्रवाई करना रह गई है, जबकि बड़े अतिक्रमणकारी और रसूखदार पूरी तरह सुरक्षित हैं।

अब अदालत की राह

निगम की निष्क्रियता से नाराज रहवासी अब कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि अगर प्रशासन नहीं जागा, तो कानूनी लड़ाई के जरिए जवाब लिया जाएगा।

बड़ा सवाल: कार्रवाई या दिखावा?

पूरा मामला यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या इंदौर नगर निगम की कार्रवाई वास्तव में जनहित में है या फिर यह सिर्फ दिखावे और दबाव की राजनीति तक सीमित है।

शहर में बढ़ते अतिक्रमण, खत्म होते फुटपाथ और बिगड़ते ट्रैफिक के बीच अब निगाहें इस बात पर हैं कि निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और संबंधित अधिकारी इस गंभीर आरोपों पर क्या कदम उठाते हैं।

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