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कुरुक्षेत्र NIT: शिक्षा का मंदिर या सुसाइड पॉइंट? 2 महीने में 4 मौतें और प्रशासन की 'खतरनाक' चुप्पीNIT Kurukshetra: A Temple of Learning or a Suicide Point? 4 Deaths in 2 Months and the Administration's 'Dangerous' Silence

 

​कुरुक्षेत्र: धर्मनगरी कुरुक्षेत्र का प्रतिष्ठित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) इन दिनों शोध और प्लेसमेंट के लिए नहीं, बल्कि कैंपस से उठती लाशों के शोर से थर्रा रहा है। पिछले मात्र 2 महीनों में 4 छात्रों की आत्महत्या ने संस्थान की साख पर गहरा बट्टा लगा दिया है। सवाल यह है कि आखिर देश के सबसे होनहार दिमागों को मौत गले लगाने पर कौन मजबूर कर रहा है?


​कैंपस में कोहराम: छात्रों का फूटा गुस्सा

​लगातार हो रही मौतों के बाद कैंपस में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन इन घटनाओं को 'निजी कारण' बताकर पल्ला झाड़ लेता है, जबकि हकीकत इसके उलट है।

​अकादमिक दबाव का पहाड़: छात्रों का कहना है कि संस्थान का कड़ा अकादमिक प्रेशर और 'अटेंडेंस' के कड़े नियम उनकी मानसिक सेहत बिगाड़ रहे हैं।

​प्रशासन की बेरुखी: आरोप है कि जब छात्र तनाव की शिकायत करते हैं, तो उन्हें सहयोग के बजाय और अधिक प्रताड़ित किया जाता है।

​सुरक्षा और काउंसलिंग का अभाव: कैंपस में मनोवैज्ञानिकों की कमी और छात्रों के साथ संवाद की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

​मौत का सिलसिला और उठते सवाल

​पिछले 60 दिनों के भीतर चार छात्रों का इस तरह जाना कोई इत्तेफाक नहीं हो सकता। यह सीधे तौर पर संस्थान के मानसिक स्वास्थ्य ढांचे (Mental Health Support) की विफलता है।

​क्या कुरुक्षेत्र NIT का प्रशासन केवल डिग्री बांटने की मशीन बन गया है?

​क्यों छात्रों की चीखें हॉस्टल के बंद कमरों से बाहर नहीं आ पा रही हैं?

​मंत्रालय और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स इन मौतों पर खामोश क्यों हैं?

​ग्राउंड जीरो की कड़वी सच्चाई: कैंपस के अंदर छात्रों में दहशत है। छात्र अब एक-दूसरे से पूछ रहे हैं— "अगला नंबर किसका?" प्रशासन को यह समझना होगा कि बिना छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के, कोई भी संस्थान 'राष्ट्रीय महत्व' का नहीं हो सकता।

​अगर समय रहते इन मौतों के सिलसिले को नहीं रोका गया और जवाबदेही तय नहीं की गई, तो कुरुक्षेत्र का यह प्रतिष्ठित परिसर महज एक 'कब्रिस्तान' बनकर रह जाएगा। जागो प्रशासन, इससे पहले कि एक और चिराग बुझ जाए!

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