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बीना MLA निर्मला सप्रे दल-बदल केस में नया मोड़, विधानसभा अध्यक्ष के सामने 22 अप्रैल को होंगी पेश, हाईकोर्ट की नजर बनीNew Twist in Bina MLA Nirmala Sapre's Defection Case: She is Set to Appear Before the Assembly Speaker on April 22, as the High Court Keeps a Watchful Eye.

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की युगलपीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ शामिल हैं, के समक्ष राज्य शासन ने विधायक निर्मला सप्रे से जुड़े दल-बदल मामले पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की।


22 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष सुनवाई

राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई से संबंधित आवेदन पर विधानसभा अध्यक्ष द्वारा 22 अप्रैल को सुनवाई निर्धारित की गई है। इस दौरान सप्रे अपना पक्ष प्रस्तुत करेंगी।

हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई 29 अगस्त तय की

सरकार के जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 29 अगस्त को निर्धारित कर दी है। अदालत ने फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है।

उमंग सिंघार की याचिका का आधार

मामला दरअसल नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में कांग्रेस की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे का निर्वाचन शून्य करने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, 30 जून 2024 को विधानसभा अध्यक्ष तोमर के समक्ष इस संबंध में आवेदन दिया गया था, लेकिन 90 दिनों के भीतर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि निर्मला सप्रे पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रही हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान 5 मई 2024 को राहतगढ़ में मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यक्रम में उनके मंच पर उपस्थित होने का भी उल्लेख किया गया है।

BJP में शामिल होने का दावा

याचिकाकर्ता का दावा है कि सप्रे भाजपा में शामिल हो चुकी हैं, बावजूद इसके उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया। इसे दल-बदल कानून के तहत गैरकानूनी बताया गया है और उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की गई है।

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