‘लैंड जिहाद’ पर प्रहार, करोड़ों की जमीन मुक्त… खसरा नंबरों में खुला खेल
इंदौर में अवैध कब्जों और कथित ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ प्रशासन का अभियान तेज हो गया है। मोहन यादव सरकार के निर्देशों के बाद लगातार कार्रवाई हो रही है और करीब 30 करोड़ रुपये से ज्यादा की जमीन मुक्त कराने का दावा किया गया है।
राजस्व दस्तावेजों के अनुसार कार्रवाई खसरा नंबर 442/1, 442/3 और 444 की शासकीय भूमि पर केंद्रित रही। इन जमीनों पर अवैध कॉलोनियां बसाने और बिना अनुमति निर्माण करने की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। जांच में सामने आया कि जमीन को लेकर भ्रम की स्थिति बनाकर प्लॉट काटे गए और लोगों को वैध कागजों का झांसा देकर बेचा गया।
प्रशासन ने पहले संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की गई। अवैध निर्माण हटाए गए और सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराया गया। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में आगे भी सख्ती जारी रहेगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
दस्तावेजों के मुताबिक इन खसरा नंबरों की जमीन की कीमत 30 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। हालांकि प्रशासन का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और जांच आगे बढ़ने पर बड़े नेटवर्क के खुलासे की संभावना है।
इस कार्रवाई के बाद सियासी माहौल भी गरमा गया है। जहां सरकार इसे जमीन माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बता रही है, वहीं विपक्ष सवाल उठा रहा है। प्रशासन अब अन्य संदिग्ध खसरों की जांच, पुराने रिकॉर्ड की पड़ताल और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रहा है।
साफ है, मामला सिर्फ 30 करोड़ तक सीमित नहीं रह सकता—आगे जांच बढ़ी तो सैकड़ों करोड़ की कहानी सामने आ सकती है।

Post a Comment