मध्य प्रदेश में चर्चित ‘सोम’ केस एक बार फिर सुर्खियों में है। दावा किया जा रहा है कि अगर सरकार सख्ती से कार्रवाई करे तो करीब 9 से 10 हजार करोड़ रुपये की वसूली संभव है। मामला फर्जी परमिट के जरिए बड़े पैमाने पर शराब तस्करी से जुड़ा बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, इस केस में 2,203 फर्जी परमिट के इस्तेमाल का आरोप है। इनमें 1,703 नामजद परमिट और 5 परमिट बुक शामिल होने का दावा किया जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि इन परमिटों का उल्लेख कोर्ट के आदेश और आबकारी विभाग के दस्तावेजों में किया गया है।
बताया जा रहा है कि जिन परमिटों पर पहले कार्रवाई हुई, उनमें एक परमिट से करीब 1,200 पेटी शराब की सप्लाई का मामला सामने आया था। इसी आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर सभी परमिटों की जांच कर टैक्स, रॉयल्टी, जीएसटी और जुर्माने की वसूली की जाए, तो सरकार को हजारों करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले में अब नए सिरे से दस्तावेजों के साथ शिकायतें संबंधित विभागों को भेजी जा रही हैं। साथ ही पुराने मामलों में क्या कार्रवाई हुई, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।
हालांकि, अब तक किसी भी संबंधित व्यक्ति या अधिकारी के खिलाफ इस पूरे आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी मानी जा रही है।
👉 अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला प्रदेश के सबसे बड़े राजस्व घोटालों में शामिल हो सकता है। फिलहाल सबकी नजर जांच और आधिकारिक कार्रवाई पर टिकी है।

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