घुटनों में लगातार दर्द, सूजन या चलने में परेशानी को हल्के में लेना ठीक नहीं है। यह Knee Osteoarthritis के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें घुटने के जोड़ की कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगती है। यह कार्टिलेज हड्डियों के बीच कुशन का काम करती है, लेकिन इसके घिसने पर हड्डियां आपस में टकराने लगती हैं, जिससे दर्द और सूजन बढ़ती है और रोजमर्रा के काम मुश्किल हो जाते हैं।
इस बीमारी के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं और समय के साथ बढ़ते जाते हैं। शुरुआत में दर्द केवल चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर होता है, लेकिन बाद में आराम के समय भी बना रह सकता है। सुबह उठने पर या लंबे समय तक बैठने के बाद घुटनों में अकड़न महसूस होती है। कई लोगों को घुटने मोड़ते समय ‘कटक’ जैसी आवाज आती है। सूजन, कमजोरी और घुटना पूरी तरह मोड़ने या सीधा करने में दिक्कत भी आम संकेत हैं।
आजकल यह समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही। कम उम्र में भी Knee Osteoarthritis के मामले बढ़ रहे हैं। इसके पीछे अधिक वजन, पुरानी चोट, लंबे समय तक बैठकर काम करना, मांसपेशियों की कमजोरी, गलत पोस्चर और फिजिकल एक्टिविटी की कमी जैसे कारण जिम्मेदार हैं। जिन लोगों के परिवार में गठिया का इतिहास है या महिलाओं में 40 के बाद हार्मोनल बदलाव होते हैं, उनमें इसका खतरा ज्यादा रहता है।
खानपान भी इस समस्या में अहम भूमिका निभाता है। तली-भुनी चीजें, पैकेज्ड फूड, ज्यादा नमक, शुगर वाली ड्रिंक्स और मैदा जैसी चीजें वजन बढ़ाती हैं और घुटनों पर दबाव डालती हैं, इसलिए इनसे दूरी बनाना जरूरी है। वहीं हरी सब्जियां, फल, ड्राई फ्रूट्स, बीज, साबुत अनाज, हल्दी, अदरक और लो-फैट डेयरी उत्पाद जोड़ों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव इस समस्या से बचाव में बड़ी भूमिका निभाते हैं। वजन कंट्रोल में रखना सबसे जरूरी है क्योंकि ज्यादा वजन सीधे घुटनों पर दबाव बढ़ाता है। नियमित रूप से हल्की एक्सरसाइज जैसे वॉक, साइकिलिंग या स्विमिंग करने से मांसपेशियां मजबूत रहती हैं। जांघों की मांसपेशियों को मजबूत करने वाली स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी घुटनों को सपोर्ट देती है। लंबे समय तक लगातार बैठने के बजाय हर 30–40 मिनट में थोड़ा चलना या स्ट्रेच करना चाहिए। सही पोस्चर और आरामदायक जूते भी घुटनों को सुरक्षित रखते हैं।
घुटने का दर्द अगर 2–3 हफ्तों से ज्यादा बना रहे, सूजन बढ़े या चलने-फिरने में दिक्कत होने लगे तो जांच कराना जरूरी है। समय रहते इलाज शुरू करने से Knee Osteoarthritis को बढ़ने से रोका जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर रखी जा सकती

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