राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 9 अप्रैल को पूर्व आईएएस Subodh Agarwal को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। अब उन्हें कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी है, जिससे मामले में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
गिरफ्तारी से पहले तक बचने की कोशिशों के बावजूद अग्रवाल को अंततः हिरासत में लेना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान उनके बयान इस पूरे मामले को और व्यापक बना सकते हैं।
सुधांश पंत पर भी बढ़ेगी जांच की आंच?
इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या एसीबी Sudhansh Pant को भी जांच के दायरे में लाएगी। अग्रवाल ने पहले ही अपने बयानों में संकेत दिया है कि जल जीवन मिशन में हुए कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के लिए वे अकेले जिम्मेदार नहीं हैं।
अग्रवाल के अनुसार, जब उन्होंने जलदाय विभाग का कार्यभार संभाला, उससे पहले विभाग के प्रमुख के रूप में पंत महत्वपूर्ण पद पर थे और टेंडरों की स्वीकृति सहित कई अहम निर्णय उनके कार्यकाल में लिए गए। बताया जा रहा है कि अग्रवाल ने टेंडरों से जुड़ी विस्तृत जानकारी लिखित रूप में एसीबी को सौंप दी है।
यदि रिमांड के दौरान अग्रवाल अपने इन बयानों को दोहराते हैं और दस्तावेजी साक्ष्य सामने आते हैं, तो एसीबी के लिए सुधांश पंत को जांच के दायरे में शामिल करना एक बड़ा प्रशासनिक कदम होगा। पंत, जो वर्तमान में केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर हैं और पहले राजस्थान के मुख्य सचिव भी रह चुके हैं, उनके खिलाफ जांच से व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
पूर्व मंत्री महेश जोशी की भी बढ़ सकती हैं मुश्किलें
जलदाय विभाग के पूर्व मंत्री Mahesh Joshi की मुश्किलें भी एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। जोशी पहले ही इस मामले में गिरफ्तार होकर जमानत पर बाहर हैं, लेकिन अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद नए सिरे से जांच की दिशा बदल सकती है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, विभागीय अधिकारियों पर कथित रूप से दबाव डालकर अपात्र फर्मों को करोड़ों रुपये के ठेके दिलवाए गए। कुछ फर्मों द्वारा फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाने और घटिया सामग्री (स्टील के स्थान पर प्लास्टिक पाइप) उपयोग करने के आरोप भी सामने आए हैं।
एसीबी की जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि जिन फर्मों को दोषी पाया गया, उनसे जुड़ा आर्थिक लेनदेन कथित रूप से जोशी के परिवार तक पहुंचा। ऐसे में यदि अग्रवाल अपने बयान में इन तथ्यों की पुष्टि करते हैं, तो जोशी की पुनः गिरफ्तारी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
प्रभावशाली प्रशासनिक नेटवर्क वाला परिवार
पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल का परिवार भी चर्चा में है, जिसमें कई सदस्य उच्च प्रशासनिक सेवाओं में पदस्थ हैं। उनकी पत्नी रोली अग्रवाल दिल्ली में आईआरएस चीफ कमिश्नर हैं, बेटा शुभम अग्रवाल मुंबई में आईआरएस अधिकारी है। परिवार में अन्य सदस्य भी आईएएस, आईपीएस और आईआरएस जैसे उच्च पदों पर कार्यरत या सेवानिवृत्त हैं।
आगे क्या?
अब इस पूरे मामले की दिशा काफी हद तक एसीबी की रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ पर निर्भर करेगी। यदि अग्रवाल के पास मौजूद दस्तावेज और उनके बयान जांच एजेंसी को संतुष्ट करते हैं, तो यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित न रहकर बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक दायरे तक फैल सकता है।
फिलहाल, राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक तंत्र दोनों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या जांच एजेंसियां इस घोटाले में और बड़े नामों को भी शामिल करती हैं या नहीं।

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