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युद्ध की मारः फल और सब्जियों के बढ़े भाव, ईरान की कीवी बाजार से गायबImpact of war: Prices of fruits and vegetables rise, Iranian kiwi disappears from the market



इजराइल-ईरान युद्ध का असर अब सीधे बाजार और आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा है। वाशिंगटन से आयातित सेब, मिस्र और चीन से आने वाले संतरे महंगे हो चुके हैं। जबकि ईरान से आने वाला कीवी बाजार से लगभग गायब हो गया है।जो थोड़ी मात्रा में कीवी उपलब्ध है, वह भी 10 से 20 प्रतिशत अधिक कीमत पर बिक रहा है। व्यापारियों के अनुसार युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और ट्रांसपोर्ट के रास्तों में बदलाव से लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर फलों की कीमतों पर पड़ा है।

आवक कम होने से सब्जियों के बढ़े दाम

इसी के साथ स्थानीय स्तर पर भी गर्मी के कारण आवक कम होने से सब्जियों के दामों में तेजी आई है, जिससे रसोई का बजट बिगड़ने लगा है और मध्यम वर्गीय परिवारों की परेशानी बढ़ गई है। पालक 60, गोभी 80 और शिमला मिर्च 80 से 100 रुपये किलो तक बिक रही है।

बैंगन, लौकी और अरबी भी 60 रुपये किलो के पार पहुंच गई हैं। लहसुन की कीमत 180 रुपये किलो तक जा चुकी है। व्यापारियों के अनुसार स्थानीय स्तर पर उत्पादन कम होने और बाहर से आने वाली सब्जियों पर बढ़े ट्रांसपोर्ट खर्च ने कीमतों को ऊपर धकेला है।

नींबू और अन्य की कीमत पर भी असर

गर्मी के साथ नींबू की मांग बढ़ गई है, जिसका असर कीमतों पर साफ दिख रहा है। पहले 10 रुपये में मिलने वाला चार नींबू अब 20 रुपये में तीन ही मिल रहा है। हरी सब्जियों के साथ-साथ धनिया और टमाटर जैसी रोजमर्रा की चीजों में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

कुल मिलाकर थोक से लेकर फुटकर बाजार तक सब्जियों के दामों में 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे हर वर्ग प्रभावित हो रहा है।

थाली और टिफिन पर असर

महंगाई का सीधा असर अब लोगों की थाली पर पड़ रहा है। सब्जियों के साथ गैस, तेल और मसालों की कीमत बढ़ने से घर का खर्च तेजी से बढ़ा है। इसका असर टिफिन और होटल व्यवसाय पर भी पड़ा है। टिफिन संचालकों ने प्रति टिफिन करीब 20 रुपये तक दाम बढ़ा दिए हैं।

बाहर खाने वालों को अब पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में कीमतों में और इजाफा हो सकता है।

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