भारतीय समय के मुताबिक इस मिशन को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट के जरिए उड़ान दी गई. जहां हजारों लोग इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बने.
मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं. कमांडर रीड वाइसमैन के साथ पायलट विक्टर ग्लोवर और कनाडा के जेरेमी हैनसेन के साथ ही क्रिस्टीना कोच शामिल हैं. यह अब तक का सबसे खास दल है, जिसमें पहली महिला, रंगभेद से जुड़ा प्रतिनिधित्व और एक गैर-अमेरिकी सदस्य शामिल है. क्रिस्टीना कोच चांद की ओर जाने वाली पहली महिला अंतरिक्ष यात्री है. यह मिशन अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती विविधता, समान अवसर और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मजबूत मिसाल को दर्शाता है
10 दिनों का होगा आर्टेमिस II मिशन
शुरुआती 25 घंटों तक अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा में रहकर कैप्सूल की जांच करेंगे. इसके बाद वो चंद्रमा की ओर बढ़ेंगे. हालांकि वो चंद्रमा पर उतरेंगे नहीं, लेकिन उसके पास से गुजरते हुए इतिहास रचेंगे. चार अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर न उतरकर उसकी परिक्रमा करके वापस लौटेंगे. 50 साल बाद इंसानों की यह यात्रा सिर्फ ऐतिहासिक नहीं, भविष्य की लंबी अंतरिक्ष यात्राओं के लिए निर्णायक वैज्ञानिक प्रयोग भी है.
यह अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा से करीब 6,400 किमी आगे तक जाएंगे और फिर वापस पृथ्वी की ओर लौटेंगे. इस दौरान वे मानव इतिहास में सबसे दूर जाने वाले लोग बन सकते हैं. यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा को एक बास्केटबॉल के आकार जैसा देखेंगे. वो इसकी तस्वीरें लेंगे और संभवतः ऐसे दृश्य देख पाएंगे जो पहले कभी इंसानों ने नहीं देखे.साथ ही, वो एक आंशिक सूर्य ग्रहण का भी अनुभव करेंगे.

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