अप्रैल, मई और जून की तेज गर्मी में लू लगना आम समस्या है, लेकिन सही समय पर सही देखभाल से इसे गंभीर होने से रोका जा सकता है। लू लगने पर शरीर का तापमान बहुत बढ़ जाता है और व्यक्ति को कमजोरी, चक्कर, उल्टी, दस्त और तेज बुखार जैसी दिक्कतें होने लगती हैं।
लू लगने पर सबसे पहले व्यक्ति को तुरंत धूप से हटाकर ठंडी या छायादार जगह पर ले जाएं। उसके कपड़े ढीले करें और शरीर को ठंडा करने की कोशिश करें। ठंडे पानी से शरीर पोंछना या गीला कपड़ा रखना काफी फायदेमंद होता है। पंखा या कूलर चलाकर शरीर का तापमान धीरे-धीरे कम करें। अगर संभव हो तो गर्दन, बगल और जांघों पर ठंडी पट्टी रखी जा सकती है।
खाने-पीने की बात करें तो सबसे जरूरी है शरीर में पानी और नमक की कमी को पूरा करना। इसके लिए ORS का घोल सबसे बेहतर माना जाता है। इसके अलावा नारियल पानी, नमक-चीनी वाला नींबू पानी, आम पन्ना और छाछ जैसे पेय शरीर को ठंडक देते हैं और जल्दी रिकवरी में मदद करते हैं। ये सभी चीजें शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखती हैं।
ध्यान रखें कि बहुत ठंडा पानी अचानक न पिलाएं, इससे शरीर को झटका लग सकता है। साथ ही चाय, कॉफी, शराब और तला-भुना खाना देने से बचना चाहिए, क्योंकि ये शरीर को और डिहाइड्रेट करते हैं।
लू से बचाव के लिए दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। हल्के और सूती कपड़े पहनें, सिर को ढककर रखें और दिनभर पर्याप्त पानी पिएं। खाली पेट धूप में जाने से भी बचना चाहिए।
अगर मरीज को बार-बार उल्टी हो, बेहोशी आए या तेज बुखार कम न हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। गर्मी के इस मौसम में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

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