आजकल हार्ट से जुड़ी जांचों में एक चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आ रहा है—कई लोगों का टोटल कोलेस्ट्रॉल सामान्य होता है, लेकिन फिर भी उन्हें हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है। वजह है LDL cholesterol (बैड कोलेस्ट्रॉल) का बढ़ना और HDL cholesterol (गुड कोलेस्ट्रॉल) का कम होना। डॉक्टरों के मुताबिक अब सिर्फ कुल कोलेस्ट्रॉल देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका संतुलन ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि जंक फूड, तनाव, कम शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान, शराब, मोटापा और पारिवारिक (जेनेटिक) कारणों की वजह से यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। पहले यह जोखिम उम्रदराज लोगों में ज्यादा देखा जाता था, लेकिन अब 30–40 साल के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
गुड और बैड कोलेस्ट्रॉल का अंतर समझना जरूरी है। HDL यानी गुड कोलेस्ट्रॉल धमनियों में जमा खराब कोलेस्ट्रॉल को हटाने में मदद करता है, जबकि LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल धमनियों में जमकर ब्लॉकेज पैदा करता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टरों का कहना है कि अगर LDL ज्यादा और HDL कम है, तो धमनियों में प्लाक जमने लगता है। इससे ब्लॉकेज बनता है और अचानक हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है, भले ही आपका टोटल कोलेस्ट्रॉल सामान्य क्यों न हो।
खतरे के संकेतों में सीने में दर्द या भारीपन, सांस फूलना, जल्दी थकान, चक्कर आना और गर्दन, हाथ या जबड़े में दर्द शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बचाव के लिए नियमित रूप से लिपिड प्रोफाइल जांच कराना जरूरी है। खानपान में हरी सब्जियां, फल और साबुत अनाज शामिल करें, तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड कम करें, रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम या वॉक करें, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाए रखें और वजन संतुलित रखें।
LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य व्यक्ति में 100–125 mg/dL के बीच होना चाहिए, जबकि हाई बीपी या डायबिटीज के मरीजों में इसे 70 mg/dL से कम रखना जरूरी है। जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक या सर्जरी हो चुकी है, उनके लिए यह स्तर 50 mg/dL से भी कम होना चाहिए।
इंदौर के एमवायएच के विशेषज्ञों के अनुसार बड़ी संख्या में ऐसे मरीज सामने आ रहे हैं जिनका टोटल कोलेस्ट्रॉल सामान्य है, लेकिन LDL ज्यादा और HDL कम है। यही असंतुलन भविष्य में हार्ट अटैक का बड़ा कारण बन रहा है।
कुल मिलाकर, दिल की सुरक्षा के लिए सिर्फ “नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल” पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। सही जांच, संतुलित जीवनशैली और समय पर सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

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