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मॉर्डन जस्टिस सिस्टम में मध्यस्थता की बढ़ती भूमिका, जस्टिस बीवी नागरत्ना बोलीं—सुलह-समझौता बेहद अहमThe Growing Role of Mediation in the Modern Justice System: Justice B.V. Nagarathna States—Reconciliation and Settlement Are Crucially Important.

 

नई दिल्ली। बीवी नागरत्ना ने आधुनिक न्याय प्रणाली में मध्यस्थता (मेडिएशन) और सुलह-समझौते की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि यह न केवल विवादों के त्वरित समाधान का माध्यम है, बल्कि न्याय व्यवस्था पर बढ़ते बोझ को कम करने में भी प्रभावी भूमिका निभाता है।


मध्यस्थता: विवाद समाधान का प्रभावी विकल्प

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि पारंपरिक अदालती प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है, ऐसे में मध्यस्थता एक वैकल्पिक और व्यवहारिक समाधान प्रदान करती है। इसमें पक्षकार आपसी सहमति से विवाद सुलझाते हैं, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है।

मध्यस्थता अधिनियम, 2023 का महत्व

उन्होंने मध्यस्थता अधिनियम, 2023 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कानून भारत में मध्यस्थता को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अधिनियम का उद्देश्य देशभर में संगठित और व्यवस्थित मध्यस्थता तंत्र विकसित करना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।

कार्यान्वयन अभी भी चुनौती

हालांकि जस्टिस नागरत्ना ने यह भी स्वीकार किया कि इस कानून का जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन अभी सीमित है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता को व्यापक रूप से अपनाने के लिए जागरूकता बढ़ाने और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है।

न्याय प्रणाली पर दबाव कम करने का माध्यम

उन्होंने बताया कि अदालतों में लंबित मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए मध्यस्थता और सुलह-समझौते जैसे विकल्प बेहद जरूरी हैं। इससे न केवल विवादों का शीघ्र निपटारा संभव है, बल्कि न्यायपालिका को भी जटिल मामलों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलता है।

भविष्य की दिशा

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि आने वाले समय में भारत की न्याय प्रणाली में मध्यस्थता एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभरेगी। इसके लिए सरकार, न्यायपालिका और समाज सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे, ताकि इसे प्रभावी और भरोसेमंद बनाया जा सके।

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