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राम मंदिर, धारा 370 और अब UCC… राज्यों के जरिए आगे बढ़ती BJP की रणनीतिRam Mandir, Article 370, and now the UCC... The BJP's strategy advancing through the states.

 


संग्पादकीय : प्रणव बजाज

भारतीय राजनीति में पिछले एक दशक के दौरान कुछ ऐसे मुद्दे उभरे हैं, जिन्होंने न केवल चुनावी विमर्श को बदला बल्कि शासन की दिशा भी तय की। राम मंदिर, धारा 370 और अब समान नागरिक संहिता (UCC) — ये तीनों विषय लंबे समय से वैचारिक और राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन मुद्दों को केवल घोषणापत्र तक सीमित नहीं रखा, बल्कि चरणबद्ध रणनीति के तहत इन्हें जमीन पर उतारने का प्रयास किया है।


पर मंदिर निर्माण और हटाने जैसे फैसलों के बाद अब UCC को लेकर हलचल तेज है। दिलचस्प यह है कि इस बार केंद्र सीधे कदम उठाने के बजाय राज्यों के जरिए इस मुद्दे को आगे बढ़ाता दिख रहा है।

यह रणनीति कई मायनों में व्यावहारिक भी है और राजनीतिक रूप से संतुलित भी। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, जहां अलग-अलग समुदायों की परंपराएं और व्यक्तिगत कानून हैं, वहां एक झटके में पूरे देश पर UCC लागू करना न केवल जटिल है, बल्कि संवेदनशील भी। ऐसे में राज्यों को प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल करना एक सोची-समझी रणनीति प्रतीत होती है।

और जैसे राज्यों में UCC को लेकर पहल इसी दिशा में एक संकेत है। यदि इन राज्यों में इसका क्रियान्वयन सफल रहता है, तो यह अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकता है। इससे केंद्र सरकार को न केवल व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, बल्कि सामाजिक प्रतिक्रिया को समझने का अवसर भी मिलेगा।

राज्यों के माध्यम से नीतियों को लागू करने की यह रणनीति संघीय ढांचे के अनुरूप भी है। इससे यह संदेश जाता है कि केंद्र किसी विचार को थोप नहीं रहा, बल्कि राज्यों को अपनी परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता दे रहा है। हालांकि, इसके पीछे राजनीतिक गणित को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जिन राज्यों में BJP मजबूत स्थिति में है, वहां ऐसे फैसले अपेक्षाकृत आसानी से लागू किए जा सकते हैं।

इसके बावजूद, UCC का मुद्दा राम मंदिर या धारा 370 जितना सीधा नहीं है। यह सीधे नागरिकों के व्यक्तिगत जीवन, विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे विषयों से जुड़ा है। ऐसे में इसके क्रियान्वयन के दौरान सामाजिक संवाद, सहमति और संवेदनशीलता बेहद जरूरी होगी।

आलोचकों का मानना है कि यह रणनीति धीरे-धीरे वैचारिक एजेंडे को लागू करने का तरीका है, जबकि समर्थक इसे लंबे समय से लंबित सुधारों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की पहल मानते हैं। सच शायद इन दोनों के बीच कहीं है।

अंततः, यह स्पष्ट है कि BJP अब बड़े और विवादित मुद्दों को सीधे टकराव की बजाय क्रमिक और संस्थागत तरीके से आगे बढ़ा रही है। राज्यों के जरिए UCC की राह बनाना उसी रणनीति का हिस्सा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह प्रयोग कितनी सामाजिक स्वीकृति पाता है और क्या यह वास्तव में पूरे देश में लागू होने की दिशा में आगे बढ़ पाता है।

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