इंदौर: इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) में चल रहे भ्रष्टाचार के एक बड़े खेल का भंडाफोड़ हुआ है। भू-माफिया पिंटू छाबड़ा ने आईडीए के एक कर्मचारी के साथ मिलकर शासन की आँखों में धूल झोंकी और फर्जी दस्तावेजों के दम पर रेडिसन होटल के सामने 'सी-21 बिजनेस पार्क' का निर्माण कर लिया।
ऐसे हुआ षड्यंत्र का खुलासा:
यह पूरा मामला तब सामने आया जब बिज़लपुर की करीब 20 हजार वर्ग फीट जमीन के ले-आउट की फाइल नगर तथा ग्राम निवेश (टीएनसीपी) कार्यालय पहुँची। जाँच में पता चला कि फाइल में लगी एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) पूरी तरह फर्जी थी। अधिकारियों के नाम का गलत उपयोग: इस जाली दस्तावेज पर नियोजन और भू-अर्जन विभाग के अधिकारियों की फर्जी सील और हस्ताक्षर मौजूद थे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विभाग की ओर से ऐसी कोई अनुमति कभी जारी ही नहीं की गई।
लिपिक की संदिग्ध भूमिका: आईडीए के विधि विभाग का लिपिक शुभम श्रीवास्तव इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। वह वर्षों से अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर कर फर्जी एनओसी टीएनसीपी को भेज रहा था। मामले की भनक लगते ही आरोपी कर्मचारी मोबाइल बंद कर फरार हो गया है।
बड़ी कार्रवाई: फर्जी एनओसी को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। आईडीए सीईओ ने अब इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए एनओसी सिस्टम को पूर्णतः ऑनलाइन करने के निर्देश दिए हैं।
निष्कर्ष: इस खुलासे ने सरकारी विभागों में पैठ जमाए बैठे भू-माफियाओं और भ्रष्ट कर्मचारियों के गठजोड़ को उजागर कर दिया है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन फरार क्लर्क की तलाश कर रहे हैं ताकि इस सिंडिकेट के अन्य चेहरों को भी सामने लाया जा सके।

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