धर्मांतरण विरोधी कानून के दुरुपयोग को लेकर Allahabad High Court ने कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि इस कानून के तहत झूठी एफआईआर दर्ज कराने का ट्रेंड चिंताजनक है और इसे गंभीरता से देखने की जरूरत है।
दरअसल, मामला उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले का है, जहां एक पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं पर आरोप लगाया गया था कि वे शिकायतकर्ता की 18 वर्षीय बेटी को बहला-फुसलाकर ले गए और उसका धर्म परिवर्तन कर शादी करने का दबाव बना सकते हैं।
सुनवाई के दौरान Allahabad High Court ने पाया कि ऐसे मामलों में बिना ठोस सबूत के गंभीर धाराएं लगा दी जाती हैं, जो कानून के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी कानून का इस्तेमाल लोगों को परेशान करने या झूठे मामलों में फंसाने के लिए नहीं होना चाहिए।
कोर्ट की इस टिप्पणी को धर्मांतरण विरोधी कानून के क्रियान्वयन पर एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। साथ ही, यह भी संकेत है कि न्यायपालिका ऐसे मामलों में सतर्क नजर बनाए हुए है, ताकि निर्दोष लोगों के अधिकारों की रक्षा हो सके।

Post a Comment