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अब EMI पर जी रहा भारत! India is now living on EMIs

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क्रेडिट कार्ड बूम, गोल्ड लोन में तेजी, एजुकेशन लोन आधे — चौंकाने वाली रिपोर्ट

भारत अब तेजी से EMI और कर्ज आधारित जीवनशैली की ओर बढ़ रहा है। हालिया रिपोर्ट्स में सामने आया है कि जहां एक ओर क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, वहीं दूसरी तरफ गोल्ड लोन में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। इसके उलट एजुकेशन लोन की ग्रोथ आधी रह गई है, जो एक चिंताजनक संकेत माना जा रहा है।


क्रेडिट कार्ड का चलन खासतौर पर शहरी और युवा वर्ग में तेजी से बढ़ा है। लोग अब रोजमर्रा के खर्च, ऑनलाइन शॉपिंग और यहां तक कि लग्जरी आइटम्स भी EMI पर खरीद रहे हैं। “Buy Now, Pay Later” जैसी सुविधाओं ने खर्च करना और आसान बना दिया है, लेकिन इससे लोगों पर कर्ज का बोझ भी बढ़ता जा रहा है।

दूसरी ओर, महंगाई और नकदी की जरूरत के चलते लोग अपने सोने को गिरवी रखकर लोन ले रहे हैं। मिडिल क्लास और छोटे कारोबारी वर्ग में गोल्ड लोन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह इस बात का संकेत है कि लोग अपनी सेविंग्स खत्म होने के बाद एसेट्स का सहारा ले रहे हैं।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात एजुकेशन लोन को लेकर सामने आई है। पहले जहां उच्च शिक्षा के लिए लोन लेना आम था, अब उसकी रफ्तार धीमी हो गई है। बढ़ती फीस, नौकरी की अनिश्चितता और आर्थिक दबाव के कारण परिवार अब एजुकेशन लोन लेने से बच रहे हैं।

इस पूरे ट्रेंड का मतलब साफ है—भारत में खपत बढ़ रही है, लेकिन वह कर्ज के सहारे चल रही है। अगर लोगों की आय उसी अनुपात में नहीं बढ़ी, तो आने वाले समय में EMI का बोझ एक बड़ी आर्थिक समस्या बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित और योजनाबद्ध कर्ज लेना ठीक है, लेकिन जरूरत से ज्यादा EMI भविष्य में वित्तीय संकट खड़ा कर सकती है। ऐसे में लोगों को खर्च के साथ-साथ बचत और निवेश पर भी ध्यान देना जरूरी है।

कुल मिलाकर, भारत की अर्थव्यवस्था भले ही तेजी से आगे बढ़ रही हो, लेकिन आम आदमी की जेब पर बढ़ता EMI का दबाव एक गंभीर चेतावनी है।

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