अशोक रघुवंशी इंदौर
आए दिन सड़कों पर जाम ओर अब तो ये जुमला भी इंदौर की पहचान बन चुका हे कि इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था खराब हे।*
बाहर से आने वाले कई सेलिब्रिटी भी इस दर्द को ब्यान कर चुके हे। *सैकड़ों 5 स्टार बैठके लेकिन हर बैठक में जनता को ही जिम्मेदार मानकर चालानी कार्यवाही ओर बढ़ाने का फैसला लिया जाता हे तो क्या इंदौर की बिगड़ी यातायात व्यवस्था के लिए जनता जिम्मेदार हे
?
नहीं साहेब ये सिर्फ हमारे नेताओं की गलती को छुपाने ओर दोष मजबूर जनता पर मढ़ने की साजिश हे।
*इंदौर विकास प्राधिकरण व नगर निगम कई बार प्लानिंग बना के दे चुका हे कि इंदौर के प्रमुख चौराहों पर फ्लाई ओवर बनाए जाने हे बावजूद इसके 2 वर्ष बीत जाने के बाद भी कार्य प्रारंभ नहीं हुआ क्यों??*
इंदौर का vip रोड व महात्मा गांधी मार्ग सबसे व्यस्त मार्ग हे। "ताजा मामला मारीमाता चौराहा फ्लाई ओवर का हे जहां इंदौर विकाश प्राधिकरण फ्लाई ओवर बना रहा था टेंडर भी निकल चुके थे फिर बात ठंडे बस्ते में चली गई अब जिम्मेदार कौन ? आपको बता दे *मारीमाता चौराहा विधानसभा 1 ओर 3 दोनों में ही आता हे तो क्या इस फ्लाई ओवर को बनने में इन दोनों विधानसभा के विधायक रोडा अटका रहे हे ?* पर क्यों *आपको तो जनता ने अपना प्रतिनिधि इसलिए चुना हे कि आप उन्हें उनकी मूलभूत सुविधाओं प्रदान कर तकलीफों से बाहर लाएंगे* लेकिन क्या आप अपने निजी स्वार्थों के चलते जनता का हित भूल गए ? ऐसा ही मामला *राजमोहल्ला चौराहे से गुरुद्वारे चौराहे तक का हे यहां भी कई साल पहले से फ्लाई ओवर की प्लानिंग चल रही हे लेकिन काम शुरू नहीं हो पा रहा।*
*ऐसा ही मामला परदेशीपुरा चौराहे का भी हे यहां भी फ्लाई ओवर बनना हे लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि के विरोध के बाद यहां भी मामला अधर में लटका हे।* ऐसे ही इंदौर के *कई चौराहे वो सड़के है जिन पर फ्लाई ओवर बनाए बिना इंदौर का यातायात सुगम नहीं हो सकता*।
*अब इसे हमारी मानवीय भूल कहे या बदकिस्मती हमने एसे नेताओं को चुना हे जो जनहित से पहले अपना हित देखते हे।
*महाराष्ट्र के मुंबई शहर में एक साथ 150 फ्लाई ओवर बनाए गए थे और आज वहां इतनी जनसंख्या होने के बावजूद यातायात सुगम हे लेकिन ये संभव हुआ वहा के शिक्षित ओर जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से निर्वहन करने वाले जनप्रतिनिधियों के कारण*। जाहिर हे जब 150 फ्लाई ओवर का काम एक साथ शुरू हुआ होगा तो जनता को बहुत तकलीफ हुई होगी। अब तकलीफ का क्या हे साहेब हम तो सालों से झेल रहे हे बिना काम हे ओर पता नहीं कब तक झेलेंगे। क्योंकि हम तो बार बार ये मानवीय भूल करने का मन बना चुके हे।

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