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बुर्ज खलीफा से लंदन तक ईडी की कार्रवाई; तीन राज्यों के रसूखदारों की 8000 करोड़ की संपत्ति कुर्कED action from Burj Khalifa to London; assets worth Rs 8,000 crore of influential people in three states seized

 

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय ने देश के तीन राज्यों से जुड़े रसूखदार कारोबारियों और उनके नेटवर्क पर अब तक की बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम देते हुए करीब 8000 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली है। यह कार्रवाई भारत से लेकर दुबई और लंदन तक फैली हुई है, जिससे पूरे नेटवर्क की अंतरराष्ट्रीय पहुंच का खुलासा हुआ है।


जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने फर्जी कंपनियों, शेल अकाउंट्स और हवाला के जरिए हजारों करोड़ रुपये विदेशों में ट्रांसफर किए। इस काले धन से दुबई के प्रतिष्ठित Burj Khalifa के आसपास लग्जरी प्रॉपर्टी और London में महंगे रियल एस्टेट निवेश किए गए।

तीन राज्यों का बड़ा नेटवर्क

ईडी की जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली से संचालित हो रहा था। स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों और कारोबारियों ने सरकारी ठेकों, खनन और रियल एस्टेट में अनियमितताओं के जरिए अवैध संपत्ति अर्जित की। इसके बाद इस रकम को परत-दर-परत घुमाकर विदेश भेजा गया, जिससे जांच एजेंसियों से बचा जा सके।

छापेमारी और जब्ती

हाल ही में की गई छापेमारी में ईडी ने देशभर में कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की। इस दौरान करोड़ों रुपये के बैंक खाते फ्रीज किए गए, दर्जनों लग्जरी गाड़ियां जब्त की गईं और कई अहम दस्तावेज बरामद हुए। विदेशों में स्थित संपत्तियों को भी अटैच करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मनी लॉन्ड्रिंग का जाल

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी कंपनियों ने फर्जी बिलिंग, ओवर-इनवॉइसिंग और अंडर-इनवॉइसिंग के जरिए काले धन को सफेद किया। इसके अलावा कई शेल कंपनियों के जरिए पैसों को घुमाकर असली स्रोत छिपाया गया। इस पूरे मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

आगे की कार्रवाई

ईडी अधिकारियों के अनुसार, मामले में कई बड़े नामों के शामिल होने की संभावना है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। एजेंसी अब इंटरपोल और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर विदेशों में निवेश की गई संपत्तियों को जब्त करने की दिशा में काम कर रही है।

यह कार्रवाई न केवल देश में आर्थिक अपराधों के खिलाफ सख्ती का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब जांच एजेंसियां वैश्विक स्तर पर फैले नेटवर्क को भी निशाने पर लेने में सक्षम हैं।

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