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खराब रिपोर्ट कार्ड वाले 6 IAS फिर बने कलेक्टर, बेहतर प्रदर्शन वालों की छुट्टी; MP ट्रांसफर लिस्ट पर सवाल6 IAS Officers with Poor Report Cards Reappointed as Collectors, High Performers Sidelined; Questions Raised Over MP Transfer List

 

भोपाल: मध्य प्रदेश में हाल ही में जारी 26 आईएएस अधिकारियों की तबादला सूची ने प्रशासनिक गलियारों में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार जहां ‘परफॉर्मेंस आधारित पोस्टिंग’ की बात करती रही है, वहीं नई सूची ने इस नीति पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, जिन अधिकारियों का पिछला प्रदर्शन कमजोर रहा, उन्हें फिर से कलेक्टर जैसी अहम जिम्मेदारी सौंप दी गई, जबकि बेहतर काम करने वालों को हटा दिया गया।


तबादला सूची का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि कई जिलों में राजस्व वसूली और लोक सेवा के मामलों में पिछड़ने वाले अधिकारियों को बड़े और महत्वपूर्ण जिलों की कमान दे दी गई। धार में जहां राजस्व वसूली मात्र 39 प्रतिशत रही और हजारों नामांतरण के मामले लंबित थे, वहां के तत्कालीन कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को भोपाल जैसे अहम जिले की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इसी तरह रीवा में 59 प्रतिशत राजस्व वसूली और करीब 4000 लंबित मामलों के बावजूद प्रतिभा पाल को सागर का कलेक्टर बनाया गया है।

मंडला में 37 प्रतिशत राजस्व वसूली के बावजूद सोमेश मिश्रा को नर्मदापुरम भेजा गया, जबकि बैतूल में 46 प्रतिशत वसूली वाले नरेंद्र सूर्यवंशी को रीवा की कमान दी गई। श्योपुर में अपेक्षाकृत बेहतर 71 प्रतिशत वसूली के बावजूद अर्पित वर्मा को शिवपुरी भेजा गया। इन फैसलों को प्रशासनिक मानकों के विपरीत माना जा रहा है।

दूसरी ओर, बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों के अधिकारियों को हटाया जाना भी सवालों के घेरे में है। नर्मदापुरम में 76 प्रतिशत राजस्व वसूली और नल-जल योजना का 95 प्रतिशत से अधिक सफल संचालन होने के बावजूद कलेक्टर सोनिया मीणा को बदल दिया गया। आंकड़े बताते हैं कि जिन अधिकारियों को हटाया गया, उनका प्रदर्शन कई मामलों में बेहतर था।

हालांकि, सूची में कुछ नाम ऐसे भी हैं जिनका काम सराहनीय रहा है। झाबुआ से सिवनी भेजी गईं नेहा मीणा ने अपने कार्यकाल में राष्ट्रीय स्तर का अवॉर्ड हासिल किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पूरी सूची एकतरफा नहीं है।

एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस तरह के तबादलों से अधिकारियों के बीच गलत संदेश जाता है कि मेहनत और प्रदर्शन से ज्यादा अन्य कारक अहम हैं। उन्होंने कहा कि इससे प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही की व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है।

नई ट्रांसफर लिस्ट के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या मध्य प्रदेश में अब भी पोस्टिंग और जिम्मेदारियां वास्तव में काम के आधार पर तय हो रही हैं या फिर कोई नया ट्रेंड उभर रहा है।

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