मध्य प्रदेश में शराब दुकानों की नीलामी इस बार आबकारी विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। एक ओर राजधानी में राजस्व में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर प्रदेशभर की 55 दुकानें अब तक बिना खरीदार के खाली पड़ी हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इन दुकानों के लिए बार-बार नीलामी प्रक्रिया अपनाई जा रही है, लेकिन ठेकेदारों की रुचि बेहद कम दिखाई दे रही है। कई इलाकों में बोली तक नहीं लग रही, जिससे विभाग की चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं—कुछ क्षेत्रों में कम बिक्री की आशंका, सख्त नियम, बढ़ी हुई लागत और लाभ की अनिश्चितता। यही वजह है कि कारोबारी इन दुकानों में निवेश करने से बच रहे हैं।
हालांकि सरकार को राजधानी से अच्छा राजस्व मिला है, लेकिन बाकी जिलों में यह स्थिति संतुलन बिगाड़ रही है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो राज्य के कुल राजस्व पर भी असर पड़ सकता है।
अब नजर इस बात पर है कि विभाग इन खाली दुकानों को भरने के लिए क्या नई रणनीति अपनाता है—चाहे शर्तों में ढील दी जाए या फिर नीलामी प्रक्रिया में बदलाव किया जाए।

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