भोपाल। मध्यप्रदेश में 428 करोड़ रुपये के पूरक पोषण आहार घोटाले को लेकर विधानसभा की लोकलेखा समिति ने कड़ा रुख अपनाया है। समिति ने महिला एवं बाल विकास विभाग से पूछा है कि घोटाले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई और दोषियों से कितनी वसूली हुई है।
यह मामला भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की 2018 से 2021 की ऑडिट रिपोर्ट के बाद सामने आया था, जिसमें पूरक पोषण आहार के उत्पादन, परिवहन और वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ था।
फर्जी परिवहन और कागजी वितरण
ऑडिट में सामने आया कि जिन वाहनों से पोषण आहार ढोने का दावा किया गया, उनके रजिस्ट्रेशन नंबर मोटरसाइकिल, कार और ऑटो-रिक्शा के निकले। छह उत्पादन केंद्र—बाड़ी, धार, मंडला, रीवा, सागर और शिवपुरी—ने 26.94 करोड़ रुपये के परिवहन का रिकॉर्ड दिखाया, जो जांच में संदिग्ध पाया गया।
करीब 62.53 करोड़ रुपये का पोषण आहार कागजों में वितरित दिखाया गया, लेकिन वह आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचा ही नहीं।
फर्जी लाभार्थी और घटिया गुणवत्ता
विभाग ने 29 हजार गैर-स्कूली किशोरियों को राशन देने का दावा किया, जबकि भौतिक सत्यापन में 49 केंद्रों पर केवल 3 लाभार्थी ही मिले। वहीं करीब 237 करोड़ रुपये के आहार के नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।
कार्रवाई में देरी पर नाराजगी
विधानसभा सचिवालय ने विभाग को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि कई बार जानकारी मांगे जाने के बावजूद जवाब नहीं मिला है, जिससे कार्रवाई में देरी हो रही है। समिति ने 15 दिनों के भीतर सभी बिंदुओं पर बिंदुवार जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
यह जानकारी भी मांगी गई
21 परियोजना कार्यालयों में 395 अपात्र बालिकाओं को प्रशिक्षण देने पर कार्रवाई
सर्वेक्षण डाटा रजिस्टर न रखने के लिए जिम्मेदारी तय करने की स्थिति
परिवहन में हुए अनियमित भुगतान की वसूली का ब्यौरा
जिलों से वसूली गई राशि के खजाने में जमा होने के प्रमाण
161 निर्माणाधीन और 10 अप्रारंभ आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति
शौचालय निर्माण और सप्लाई में लापरवाही करने वाले समूहों पर कार्रवाई
हालिया छापेमारी में भी खुलासे
मार्च 2026 में जबलपुर और धार में छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में पोषण आहार का अवैध भंडारण पकड़ा गया। जबलपुर में एक निजी परिसर से 138 बोरी आहार जब्त किया गया, जिसे आंगनवाड़ी तक पहुंचाने के बजाय कालाबाजारी के लिए रखा गया था।
समिति की सख्ती के बाद अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि विभाग कितनी पारदर्शिता से जवाब देता है और दोषियों पर कब तक ठोस कार्रवाई होती है।

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