मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिख रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच टकराव का केंद्र बना है होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए इसकी स्थिति पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है।
सूत्रों के अनुसार ईरान ने तनाव कम करने और इस मार्ग को पूरी तरह सामान्य रखने के लिए अमेरिका के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं। पहली, उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को हटाया जाए ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को राहत मिल सके। दूसरी, विदेशों में फंसी उसकी अरबों डॉलर की संपत्तियों को वापस किया जाए। तीसरी, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य दबाव और मौजूदगी को कम किया जाए।
दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप इन शर्तों को मानने के पक्ष में नहीं दिख रहे। इसके पीछे कई रणनीतिक और राजनीतिक कारण हैं। अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहता है ताकि वह अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर नरम रुख अपनाए। साथ ही घरेलू राजनीति में भी कड़ा रुख दिखाना जरूरी माना जाता है। अमेरिका के सहयोगी देश भी ईरान के प्रति सख्ती बनाए रखने के पक्ष में हैं।
दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी इतनी ज्यादा है कि सीधे बातचीत तक नहीं हो पा रही। ईरान बिना शर्तों के वार्ता चाहता है, जबकि अमेरिका पहले अपनी शर्तें मनवाने की रणनीति पर कायम है। यही वजह है कि गतिरोध बना हुआ है और कोई भी पक्ष पहले कदम उठाने को तैयार नहीं दिखता।
अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है या आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ेगा। भारत जैसे देशों में महंगाई बढ़ सकती है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी दबाव आएगा।
कुल मिलाकर हालात ऐसे हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच टकराव जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा। शर्तें सख्त हैं, रुख कड़ा है और भरोसे की कमी सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

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