पश्चिम एशिया में अमेरिका-इस्राइल के साथ ईरान के युद्ध को पांच हफ्तों से ज्यादा समय बीच चुका है। इस बीच इस्राइली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने ईरान और लेबनान में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए 200 से अधिक ईरानी और लेबनान में 140 हिजबुल्ला संपत्तियों को निशाना बनाया। यह अभियान लंबी दूरी की मारक क्षमता और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के रक्षा नेटवर्क को ध्वस्त करने के उद्देश्य से चलाया गया।
आईडीएफ ने ईरान के भीतर कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें आईआरजीसी का एक केंद्रीय स्थल शामिल है, जहां विभिन्न प्रकार के हथियार संग्रहीत थे। आईआरजीसी की वायु रक्षा प्रणालियों को भी निशाना बनाया गया। इसके अलावा विमानों को निशाना बनाने के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों के उत्पादन, भंडारण और विकास से संबंधित स्थलों पर भी हमले की पुष्टि की गई है।
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पुष्टि की है कि इन हमलों ने ईरान के औद्योगिक आधार को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त किया है। उन्होंने बताया कि ईरान की 70 प्रतिशत इस्पात उत्पादन क्षमता नष्ट हो गई है, जिसका उद्देश्य आईआरजीसी को धन के स्रोत और बड़ी मात्रा में हथियार बनाने की क्षमता दोनों से वंचित करना है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस कार्रवाई को एक जबरदस्त उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सहयोगियों के साथ मिलकर वे ईरान में आतंकवादी शासन को कुचलने का काम जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस्राइल और अमेरिकी सेना के बीच पूर्ण समन्वय में ईरान को कुचला जाएगा। नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि ईरानी शासन वर्तमान में पहले से कहीं अधिक कमजोर है, जबकि इस्राइल पहले से कहीं अधिक मजबूत है।

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