मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत का कोई नतीजा न निकलने से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उबाल देखने को मिल रहा है। सोमवार को बाजार खुलते ही ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्लूटीआई के दामों में 8 पर्सेंट तक की बड़ी बढ़त दर्ज की गई। इस उछाल के साथ ही कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं। डब्लूटीआई ने 105 डॉलर के लेवल को टेस्ट किया, जबकि ब्रेंट क्रूड की शुरुआत 102.39 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर हुई।
अमेरिका की बड़ी कार्रवाई और हॉर्मुज की नाकेबंदी
तेल की कीमतों में आई इस अचानक तेजी के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वह धमकी है, जिसमें उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी करने की बात कही है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही बातचीत फेल होने के बाद अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने साफ कर दिया है कि वे सोमवार सुबह 10 बजे से हॉर्मुज के रास्ते आने-जाने वाले जहाजों को रोकना शुरू कर देंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि सिर्फ उन्हीं जहाजों को रोका जाएगा जो ईरान के पोर्ट्स की ओर जा रहे हैं। गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों पर फिलहाल कोई पाबंदी नहीं होगी, लेकिन इस खबर ने ही पूरे मार्केट में घबराहट पैदा कर दी है।
ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर मंडराता संकट
हॉर्मुज का यह रास्ता पूरी दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया की लगभग 20 पर्सेंट एनर्जी सप्लाई इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरती है। फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से ही यह रास्ता लगभग बंद पड़ा है। कच्चे तेल के साथ-साथ यूरोपियन गैस फ्यूचर्स में भी 18 पर्सेंट की भारी तेजी देखी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कुछ जहाजों से पेमेंट लेना भी शुरू कर दिया है, जबकि कुछ जहाज ईरानी सेना के तालमेल के साथ ही वहां से निकल पा रहे हैं। इस रास्ते के बंद होने का सबसे बुरा असर इमर्जिंग मार्केट्स पर पड़ सकता है, जो अपनी जरूरतों के लिए खाड़ी देशों के तेल पर निर्भर हैं।
तनाव बढ़ने से दूसरे रास्तों पर भी खतरा
इस विवाद के बीच अब दूसरे समुद्री रास्तों पर भी खतरा बढ़ गया है। जानकारों का कहना है कि अगर ईरान को लगा कि उसकी तेल एक्सपोर्ट की क्षमता को खतरा है, तो वह यमन में मौजूद हूती ताकतों के जरिए लाल सागर के रास्ते यानी बाब अल-मंडेब पर भी हमले करवा सकता है। रविवार को इस्लामाबाद में बातचीत टूटने के बाद दो बड़े जहाजों को बीच रास्ते से ही वापस मुड़ना पड़ा है। इस बीच सऊदी अरब ने राहत की खबर दी है कि उसने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और मनीफा फील्ड से सप्लाई की क्षमता को पूरी तरह बहाल कर लिया है। यह पाइपलाइन लाल सागर तक तेल पहुंचाने का एक अहम जरिया है, जो मौजूदा संकट में काफी मददगार साबित हो सकती है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें अब अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हैं।

Post a Comment