महाराष्ट्र की राजनीति में लगातार हो रहे दल-बदल के बीच अब सोलापुर से बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है। हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के बाद बदलते समीकरणों के बीच शिवसेना ने यहां अपनी ताकत और मजबूत कर ली है। पंढरपुर में रविवार को आयोजित एक जनसभा के दौरान तीन बड़े नेताओं ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शिवसेना का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम से आगामी चुनावों में भाजपा विधायक समाधान औताडे की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
भगीरथ भालके समेत कई बड़े चेहरों का शिवसेना में प्रवेश
पंढरपुर के प्रभावशाली नेता भगीरथ भालके (Bhagirath Bhalke), उनकी पत्नी और पंढरपुर की नगराध्यक्ष डॉ. प्रणिता भालके और पूर्व मंत्री व विधायक तानाजी सावंत के भतीजे अनिल सावंत ने औपचारिक रूप से शिवसेना में प्रवेश किया। इनके साथ ही सैकड़ों पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी शिवसेना का भगवा झंडा अपने हाथों में लिया। मुख्यमंत्री ने सभी का स्वागत करते हुए इसे विकास की नई शुरुआत बताया।
पंढरपुर में विकास की गंगा लाएंगे भालके- शिंदे
इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने भगीरथ भालके की प्रशंसा करते हुए कहा कि जिस तरह भगीरथ ने धरती पर गंगा को उतारा था, उसी तरह भगीरथ भालके पंढरपुर में विकास की गंगा लाएंगे।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने अक्सर चाचा-भतीजे की प्रतिद्वंद्विता वाली राजनीति देखी है, लेकिन यहां तानाजी सावंत और उनके भतीजे अनिल सावंत शिवसेना के लिए एक साथ मिलकर काम करेंगे।
ऑपरेशन टाइगर अफवाह है- शिंदे
विरोधियों पर निशाना साधते हुए शिंदे ने कहा कि ऑपरेशन टाइगर जैसा कुछ नहीं है, यह सिर्फ कुछ चैनलों की अटकलें हैं। जिसे सुनकर कुछ लोग 'म्याऊं-म्याऊं' कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे के विचारों से प्रेरित होकर रोजाना हजारों नेता, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता शिवसेना से जुड़ रहे हैं।
शिंदे ने यह भी स्पष्ट किया कि भगवा झंडा केवल एक राजनीतिक प्रतीक नहीं, बल्कि यह प्रभु श्रीराम, छत्रपति शिवाजी महाराज और हिंदुत्व की परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है।

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