देश की शीर्ष अदालत ने यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने पर संसद को विचार करने के लिए कहा है। अदालत शरीयत कानून को खत्म करने वाली याचिका पर विचार कर रही थी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और आर महादेवन की बेंच के समक्ष थी।
पीठ ने कहा कि अगर अदालत शरीयत कानून को खत्म कर देगा, तो इससे कानूनी तौर पर एक खालीपन पैदा हो जाएगा, क्योंकि मुस्लिम विरासत को कंट्रोल करने वाला कोई कानून नहीं रहेगा। अदालत ने इस मांग को अच्छा बताते हुए कहा कि इस याचिका पर सिर्फ लेजिस्लेचर को ही विचार करना चाहिए।
जस्टिस बागची बोले- कोर्ट ने कई बार की सिफारिश
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सुधारों की चिंता में हम उन्हें उस हक से भी वंचित न कर दें, जो उन्हें पहले से मिल रहा है। जस्टिस बागची ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इसे लेजिस्लेचर के विवेक पर छोड़ देना चाहिए, जिसके पास यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का अधिकार है
जस्टिस बागची ने कहा, 'एक आदमी के लिए एक पत्नी का नियम सभी समुदायों पर एक जैसा लागू नहीं हो रहा है। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि कोर्ट सभी दो शादियों को गैर-संवैधानिक घोषित कर सकता है? इसलिए, हमें डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स को लागू करने के लिए लेजिस्लेटिव पावर पर निर्भर रहना होगा।'

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