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कोर्ट में दी खुद को आग लगाने की धमकी, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा- अदालत को डराने की कोशिश बर्दाश्त नहींThreatened to set himself on fire in court, Chhattisgarh High Court said – Attempts to intimidate the court will not be tolerated

 एक मामले की सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह का वाकया अदालत को डराने की कोशिश है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। जिला अदालत द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए दोनों आरोपितों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था।


सुनवाई पूरी होने के बाद हाई कोर्ट ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश को प्रकरण को दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए हैं। मामला बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा स्थित न्यायालय में चल रहे एक चेक बाउंस प्रकरण से जुड़ा है। गजेंद्र सिंह के खिलाफ मामला विचाराधीन है

अधिकारी को नोटिस दिया

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बलौदाबाजार ने हाई कोर्ट को भेजी शिकायत में बताया कि दोनों अभियुक्तों ने अदालत की कार्यवाही में व्यवधान डाला और पीठासीन अधिकारी को एक लिखित नोटिस थमा दिया।

नोटिस में न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक, अभद्र और मानहानिकारक आरोप लगाए गए थे। सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे वाहन से पेट्रोल निकालकर सिमगा कोर्ट परिसर में आत्महत्या कर लेंगे। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई।

डिवीजन बेंच ने कहा कि आरोपियों के आचरण से यह प्रतीत होता है कि वे अदालत को डराने का प्रयास कर रहे हैं। उनके व्यवहार में किसी प्रकार का वास्तविक पश्चाताप नहीं दिखता। कोर्ट ने इसे न्यायालय की गरिमा के विपरीत बताया। हाई कोर्ट ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि प्रकरण को जेएमएफसी कोर्ट से स्थानांतरित कर सुनवाई के लिए भेजा जाए, ताकि निष्पक्ष और निर्भीक वातावरण में न्यायिक प्रक्रिया जारी रहे।

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