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मंत्री तुलसी सिलावट के इस्तीफे की उठी मांग, PM को लिखा गया लेटरDemands raised for Minister Tulsi Silawat's resignation; letter written to the PM.



मध्य प्रदेश में कारम बांध को लेकर एक बार फिर से सियासत तेज होती हुई दिखाई दे रही है, जहां प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है और उन्होंने जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट को मंत्रिमंडल से तत्काल हटाने की मांग कर डाली है और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की भी बात कही गई है. इसके अलावा पूरे मामले में आर्थिक अपराध का प्रकरण दर्ज कराने की मांग की गई है. प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए हैं. इसके अलावा मंत्री तुलसी सिलावट के इस्तीफे के मांग की है.


प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा ने आरोप लगाया कि अगस्त 2022 में निर्माणाधीन बांध के क्षतिग्रस्त होने से लाखों लोगों के जीवन पर खतरा मंडराने लगा था. घटना के बाद सितंबर 2022 में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई थी.

पांच इंजीनियरों को पाया गया दोषी

उन्होंने पत्र में आगे लिखा है कि जांच रिपोर्ट में निर्माण कार्य में तकनीकी लापरवाही, अमानक निर्माण सामग्री और पर्याप्त तैयारी के बिना बांध के नाला पोर्शन को बंद करने जैसे गंभीर फैसलों को संकट का कारण बताया गया है. रिपोर्ट में पांच इंजीनियरों को दोषी पाया गया है.

इतने गंभीर आरोपों के बावजूद संबंधित अधिकारी को निलंबन से बहाल कर जल संसाधन विभाग की महत्वपूर्ण तकनीकी संस्था ब्यूरो ऑफ डिजाइन (बोधी) में संचालक (बांध) का प्रभार दे दिया गया.

तुलसी सिलावट के इस्तीफे की कर डाली मांग

इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय जांच की फाइल लंबे समय तक लंबित रखी गई और जांच अधिकारी के अनुमोदन में लगभग एक वर्ष का विलंब किया गया. उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट को तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाए.

है कारम बांध मामला?

मध्य प्रदेश के धार जिले में कारम बांध मामला एक चर्चित प्रशासनिक और तकनीकी विवाद है. इसमें अगस्त 2022 में अचानक दरार पड़ गई थी. इससे बांध टूटने का खतरा बढ़ गया था. इसके बाद आसपास के कई गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया.प्रशासन ने तुरंत कई गांव खाली करवाए और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया था. बाद में बांध का पानी नियंत्रित तरीके से निकालकर खतरे को टाला गया.

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