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स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरा, गृह मंत्री अमित शाह के जवाब पर जबरदस्त हंगामाNo-confidence motion against Speaker defeated, Home Minister Amit Shah's reply sparks uproar

ओम बिरला ने सदन के मानकों को गिरने न देकर सदन पर एहसान किया, बोले शाह

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर हमला करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "उन्हें अचानक एक विचार आया - अपनी ही प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बहस करवा लें. यह कोई बाजार नहीं है. यह लोकसभा है... आपके परदादा से लेकर आपकी दादी और आपके पिता तक, भारत में कई महान नेता हुए हैं. लोकसभा में किसी की भी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बहस नहीं हुई. अगर उन्हें उम्मीद है कि उनकी झूठ पर आधारित 'महान प्रेस कॉन्फ्रेंस' पर सदन में बहस होगी, तो ओम बिरला ने सदन के मानकों को गिरने न देकर सदन पर एहसान किया है."


हमने स्पीकर पद की गरिमा को संरक्षण करने का काम किया', बोले गृह मंत्री अमित शाह

"हम भी विपक्ष में रहे हैं, तीन बार लोकसभा के स्पीकर पर अविश्वास का प्रस्ताव आया, मगर भारतीय जनता पार्टी और एनडीए विपक्ष में रहते हुए कभी लोकसभा स्पीकर पर अविश्वास का प्रस्ताव नहीं लाए. हमने स्पीकर पद की गरिमा को संरक्षण करने का काम किया है और स्पीकर से हमारे कानूनी अधिकार और संवैधानिक अधिकारों के लिए संरक्षण की मांग भी करी है. किसी के एडवाइजर एक्टिविस्ट हो सकते हैं, किसी के एडवाइजर आंदोलनकारी हो सकते हैं, मगर आंदोलन और एक्टिविस्ट को सदन में सदन के नियमों के अनुसार ही चलना पडे़गा, क्योंकि यहां नियम बनाए गए हैं. मैं बताना चाहता हूं कि आप अधिकार का संरक्षण कर सकते हैं, लेकिन विशेषाधिकार के मुगालते में जो लोग जीते हैं उनको उनकी पार्टी और जनता भी संरक्षण नहीं देती है... इसलिए वो छोटे होते जा रहे हैं."


"पहले जो तीन बार प्रस्ताव आया था, वो तब आया जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, लेकिन हम कभी नहीं लाए. तीनों बार ये परंपरा रही कि जब स्पीकर पर अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा होगी तब इस स्थान पर स्पीकर साहब स्थान ग्रहण नहीं करेंगे. लेकिन ओम बिरला जी एकमात्र स्पीकर ऐसे हैं, जिन्होंने मोरल ग्राउंड पर जब से इन्होंने उन्हें नामित किया, तब से वो नहीं आए हैं."


स्पीकर मध्यस्थ की भूमिका निभाता है, संदेह जताना अनुचित'

"संविधान ने अध्यक्ष को मध्यस्थ की भूमिका सौंपी है. आप मध्यस्थ पर ही संदेह जता रहे हैं. 75 वर्षों में दोनों सदनों ने हमारे लोकतंत्र की नींव को 'पाताल' से भी अधिक मजबूत बना दिया है. विपक्ष ने उस मजबूत नींव की प्रतिष्ठा पर ही सवाल उठाया है. विपक्ष जब निर्णय की निष्ठा पर सवाल खड़ा करता है तो मान्यवर ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और निंदनीय भी है. ये हमारी परंपरा, उच्च परंपराओं का निर्वहन करने के लिए बहुत अफसोसजनक घटना है."

स्पीकर के निर्णय पर असहमति व्यक्त हो सकती है, पर ...', बोले गृह मंत्री

"मैं पूरे सदन को बताना चाहता हूं कि विद्यमान स्पीकर की नियुक्ति जब हुई, तब दोनों दलों के नेता ने एक साथ उन्हें आसन पर बैठाने का काम किया. इसका मतलब है कि स्पीकर को अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों ने एक प्रकार से मुक्त माहौल भी देना है और दायित्वों के निर्वहन के लिए उनका समर्थन भी करना है. मगर आज स्पीकर के निर्णय पर कोई असहमति तो व्यक्त हो सकती है, लेकिन लोकसभा के नियमों में स्पीकर के निर्णयों को अंतिम माना गया है. इसके विपरित विपक्ष ने स्पीकर की निष्ठा पर सवालिया निशान खड़ा किया. ये लोकसभा भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है, और न केवल भारत, बल्कि दुनियाभर में हमारी लोकतंत्र की साख बनी है, गरिमा बनी है... और पूरी दुनिया लोकतंत्र की इस प्रतिष्ठा को स्वीकार करती है. लेकिन जब इस पंचायत के मुखिया पर, उसकी निष्ठा पर सवालिया निशान लगता है तो केवल देश में नहीं, पूरी दुनिया में हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा होता है. लेकिन यहां उन पर शंका के सवाल उठा दिए."

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