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हाई-स्पीड कॉरिडोर का बड़ा असर: छोटे शहरों की अर्थव्यवस्था को मिलेगा सीधा फायदाMajor Impact of High-Speed ​​Corridors: Small-Town Economies to Reap Direct Benefits

 

सम्पादकीय

नई परिवहन परियोजनाओं के जरिए छोटे शहरों और कस्बों को बड़े आर्थिक केंद्रों से सीधे जोड़ा जाएगा। तेज आवागमन, कम लॉजिस्टिक लागत और व्यापारिक गतिविधियों में बढ़ोतरी से स्थानीय रोजगार, उद्योग और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है।


केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक विकास की धुरी बताया है। इसी को ध्यान में रखते हुए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश किया जा रहा है। बजट में भी इसकी झलक दिखाई दी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में 12.2 लाख करोड़ रुपये के पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर का ऐलान किया। ये पिछले बजट की तुलना में लगभग 9 फीसदी ज्यादा है। बजट में रेलवे के आधुनिकीकरण पर काफी जोर है। वहीं हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाने की भी बात कही गई है। माल के जल्द परिवहन के लिए नए फ्रेट कॉरिडोर बनाए जाएंगे। बजट में राष्ट्रीय जलमार्गों और आर्थिक कॉरिडोर के विस्तार की भी बात कही गई है। ऐसे में स्पष्ट तौर पर दिखता है कि देश के तेज आर्थिक विकास के लिए सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की गति को बढ़ाने का प्रयास कर रही है।

मजबूत ढांचागत विकास पर फोकसवित्त मंत्री की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च के लिए पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर पर 12.2 लाख करोड़ रुपये के खर्च का ऐलान किया गया है। पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर के तहत मिले पैसे से देश में बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे रोड, रेल , पुल, बंदरगाह, जलमार्ग आदि बनाने का काम किया जाता है। ये सभी देश के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को साधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। देश में शहरी और ग्रामीण कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर फोकस किया जाएगा। इससे रोजगार के मौके बढ़ेंगे। आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी जिससे जीडीपी बढ़ंगी।

देश के विकास की रफ्तार बढ़ाएगी हाई स्पीड रेलबजट में भारतीय रेल के लिए 2.93 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस पैसे से हाई स्पीड कनेक्टिविटी, माल ढुलाई और सुरक्षित रेल सफर सुनिश्चित किया जाएगा। बजट में देश भर में सात नए हाई-स्पीड कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया गया है। इनमें मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी शामिल हैं। दक्षिण हाई-स्पीड डायमंड से कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के बीच कनेक्टिविटी बढ़ेगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक लगभग 4,000 किलोमीटर में फैले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से करीब 16 लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है। देश के पूर्व और पश्चिम हिस्से में व्यापार को मजबूती प्रदान करने के लिए पश्चिम बंगाल के डानकुनी और सूरत के बीच 2052-किमी लंबा नया समर्पित मालवाहक कॉरिडोर बनाया जाएगा। इससे देश में माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स दक्षता सुधरेगी।रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य रहे विजय दत्त कहते हैं कि सरकार ने पिछले कुछ सालों में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। और ये निवेश अभी भी जारी है। पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर का काम लगभग पूरा हो चुका है। इससे रेल माल ढुलाई में वृद्धि होगी। साथ ही यात्रियों के लिए ज्यादा ट्रेनें चलाने में मदद मिलेगी। रेलवे को कार्बन शून्य बनाने के लिए 2030 तक का लक्ष्य रखा गया था। आज रेलवे लगभग पूरी तरह से विद्युतीकृत हो गई है। वही देश में आज लगभग 50 फीसदी ऊर्जा अक्षय ऊर्जा स्रोतों से आ रही है। सरकार का पूरा प्रयास है इसे और बढ़ाया जा सके। सरकार रोड ट्रैफिक को कम करने और कार्बन उत्सर्जन को घटाने के लिए पहले ही सेमी हाई स्पीड ट्रेन, बुलेट ट्रेन, मोनो रेल आदि परियोजनाओं पर काम कर रही है। शहरों को जोड़े जाने से सड़कों से ट्रैफिक कम करने के साथ ही कार्बन उत्सर्जन को घटाने में काफी मदद मिलेगी। इस बजट में सरकार ने जलमार्गों के विकास पर भी जोर दिया है। जलमार्ग सबसे कम ऊर्जा खपत वाला परिवहन माध्यम है। अगर इस दिशा में सफलता मिलती है तो ये बड़ी उपलब्धि होगी।

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