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देश की न्यायिक व्यवस्था में बड़े सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। Important steps have been taken towards major reforms in the judicial system of the countr



नई दिल्ली / भोपाल, 9 मार्च

 नईव्यवस्था के तहत अब उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति में महिलाओं, अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण नियम लागू किए जाने की घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य न्यायपालिका में विविधता और समावेशिता बढ़ाना है।

साथ ही न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु भी बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी गई है। माना जा रहा है कि इससे अनुभवी न्यायाधीशों की सेवाएं अधिक समय तक न्याय व्यवस्था को मिल सकेंगी और लंबित मामलों के निपटारे में भी सहायता मिलेगी।

एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत सर्वोच्च न्यायालय की तीन नई सर्किट बेंच खोली जाएंगी। ये बेंच कोलकाता, चेन्नई और मुंबई में स्थापित की जाएंगी। इन क्षेत्रीय बेंचों के शुरू होने से देश के विभिन्न हिस्सों के नागरिकों को न्याय पाने के लिए नई दिल्ली तक यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।

नई व्यवस्था के अनुसार मध्यप्रदेश से संबंधित मामलों की सर्वोच्च न्यायालय में अपील अब नई दिल्ली के बजाय मुंबई सर्किट बेंच में सुनी जाएगी। इससे मध्यप्रदेश सहित पश्चिम और मध्य भारत के लोगों को न्यायिक प्रक्रिया में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों से न्यायपालिका तक आम लोगों की पहुंच आसान होगी और न्यायिक प्रणाली अधिक प्रभावी बन सकेगी।

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