Top News

वेस्ट एशिया संकट पर संसद में बहस की मांग, प्रियंका गांधी ने कहा सदन में हो चर्चाDemand for Parliamentary Debate on West Asia Crisis; Priyanka Gandhi Calls for Discussion in the House

 

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के भारत पर बढ़ते असर को लेकर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को संसद में चर्चा की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा आर्थिक, सुरक्षा और ऊर्जा के लिहाज से बेहद अहम है, इसलिए इस पर सदन में व्यापक बहस होनी चाहिए ताकि विपक्ष भी अपनी बात रख सके।


संसद में चर्चा की मांग

प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में इस मुद्दे पर देश को जानकारी दी है, लेकिन अब जरूरी है कि संसद में इस पर विस्तृत चर्चा हो। उन्होंने कहा, “देश को स्थिति से अवगत कराया गया है, लेकिन सदन में चर्चा होनी चाहिए ताकि हम भी अपने विचार प्रस्तुत कर सकें।”

पीएम मोदी ने बताई चुनौतियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया संघर्ष के भारत पर पड़ने वाले प्रभावों को रेखांकित करते हुए कहा कि इस युद्ध ने देश के सामने अभूतपूर्व चुनौतियां खड़ी की हैं। उन्होंने बताया कि ये चुनौतियां आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय पहलुओं से जुड़ी हुई हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र के देशों के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक संबंध हैं और यह इलाका वैश्विक व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है।

ऊर्जा सुरक्षा पर असर

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की कच्चे तेल और गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा होता है, ऐसे में इस संघर्ष का असर देश की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। आपूर्ति में अनिश्चितता को देखते हुए सरकार ने घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी है।

उन्होंने बताया, “देश अपनी एलपीजी आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है। इस स्थिति में घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देना जरूरी है, साथ ही उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है।”

पेट्रोलियम भंडार और सप्लाई व्यवस्था

प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि देशभर में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सुचारु बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारत के पास 5.3 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार उपलब्ध है।

विपक्ष का दबाव बढ़ा

इस मुद्दे पर विपक्षी दल भी सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं। कई सांसदों ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और उसके भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संभावित प्रभाव को लेकर संसद में चर्चा कराने की मांग की है।

Post a Comment

Previous Post Next Post