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राष्ट्रपति का वृंदावन दौराः कौन थे उड़िया बाबा? जिनके 77वें निर्वाणोत्सव दिवस पर पुष्पांजलि अर्पित करने आएंगी द्रोपदी मुर्मुPresident's Visit to Vrindavan: Who Was Oriya Baba? Draupadi Murmu to Offer Floral Tributes on His 77th Nirvana Anniversary




ओडिशा से चलकर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाभूमि को अपनी साधना स्थली का केंद्र बनाने वाले उड़िया बाबा के निर्वाण दिवस पर 20 मार्च को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु पुष्पांजलि देने उड़िया बाबा आश्रम पहुंचेंगी। वैष्णव संप्रदाय के संत उड़िया बाबा की साधना स्थली पर उनके समाधि स्थल पर ध्यान करेंगी और पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए पहुंचेंगी।

19 मार्च को जिले में आ रहीं राष्ट्रपति

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु तीन दिवसीय प्रवास पर 19 मार्च की शाम को वृंदावन आ रही हैं। राष्ट्रपति अनेक आश्रम, मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचेंगी। रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में कैंसर यूनिट का लोकार्पण करेंगी। ओडिशा जन्मभूमि होने के नाते राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ओडिसा से वृंदावन आकर साधक बने संत उड़िया बाबा की साधना स्थली के दर्शन करेंगी।

20 मार्च को उड़िया बाबा का 77वां निर्वाणोत्सव 

राष्ट्रपति उड़िया बाबा आश्रम पहुंचेंगी, उसी दिन उड़िया बाबा का 77वां निर्वाणोत्सव भी है। राष्ट्रपति ने खास बाबा महाराज के निर्वाणोत्सव में शामिल होने के लिए 20 मार्च को वृंदावन प्रवास का कार्यक्रम बनाया है। वह इस दिन उड़िया बाबा महाराज की साधना स्थली व उनके संग्रहालय के दर्शन करेंगी। आश्रम प्रबंधक कुलदीप दुबे ने बताया आश्रम में राष्ट्रपति के स्वागत की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं।

20 मार्च को उड़िया बाबा आश्रम पहुंचेंगी

राष्ट्रपति 20 मार्च की सुबह 11.50 बजे पहुंचेंगी। मंदिर में दर्शन के बाद राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु संत उड़िया बाबा की समाधि स्थल पर ध्यान रखेंगी। यहां से उड़िया बाबा महाराज के संग्रहालय में उनके जीवन से जुड़ी वस्तुओं, चित्रों का अवलोकन करेंगी और यहां करीब 20 मिनट ठहरने के बाद गंतव्य को चली जाएंगी।

1937 में वृंदावन आए थे संत उड़िया बाबा महाराज

वर्ष 1875 में मूलरूप से ओडिशा में जन्मे संत पूर्णानंद तीर्थ उड़िया बाबा के नाम से प्रख्यात हुए। बाबा सन 1937 में वृंदावन आए और यहां रहकर कृष्ण भक्ति में ही अपना जीवन व्यतीत किया। आधुनिक भारत के महान संतों और तपस्वियों में उड़िया बाबा शामिल हैं। उनका जन्म उड़ीसा (वर्तमान ओडिशा) की भूमि में हुआ। यही कारण है उन्हें उड़िया बाबा के नाम से जाना जाता था। बाल्यकाल से ही उनके स्वभाव में गहरी शांति, सरलता और वैराग्य के दिव्य लक्षण दिखाई देते थे।

युवावस्था में ही उनके हृदय में भगवान श्रीकृष्ण के प्रति गहन प्रेम और भक्ति जागृत हुई

सांसारिक विषयों में उनकी विशेष रुचि नहीं थी और वे प्रायः एकांत में रहकर चिंतन, मनन तथा भगवान के स्मरण में लीन रहते थे। युवावस्था में ही उनके हृदय में भगवान श्रीकृष्ण के प्रति गहन प्रेम और भक्ति जागृत हुई। इसी भाव से प्रेरित होकर उन्होंने सांसारिक जीवन से विरक्त होकर आध्यात्मिक साधना का मार्ग अपनाया और वृंदावन आए। वहीं रहकर भगवान की भक्ति, तपस्या और संत सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया।

वर्ष 1947 में संत उड़िया बाबा का निकुंजवास हो गया

इसी दौरान उन्होंने दावानल कुंड पर आश्रम बना लिया, जहां अनेक सेवाप्रकल्प व संस्कृति अध्ययन के लिए विद्यालय का संचालन हो रहा है। वर्ष 1947 में संत उड़िया बाबा का निकुंजवास हो गया। तब से आश्रम में समाधि पूजन होता है। 20 मार्च को बाबा महाराज का 77वां निर्वाणोत्सव मनाया जाएगा।

रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के नवनिर्मित कैंसर यूनिट का करेंगी लोकार्पण

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु 20 मार्च को रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के कैंसर यूनिट का लोकार्पण करने दोपहर साढ़े बारह बजे पहुंचेंगी। यूनिट का लोकार्पण करने के साथ अवलोकन व सभा को संबोधित करेंगी। रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में वर्तमान में कैंसर का अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से उपचार चल रहा था। लेकिन, अस्पताल प्रबंधन ने कैंसर के संपूर्ण उपचार के लिए एक नई कैंसर यूनिट की स्थापना की है।

400 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में कैंसर रोगियों के लिए अत्याधुनिक मेडिकल संसाधनों से सुसज्जित कैंसर ब्लाक में रेडियोथेरेपी, ब्रकीथेरेपी, कैंसर आधुनिक शस्त्र चिकित्सा, कीमोथेरेपी, इम्मुनोथेरपी एवं हार्मोनथेरपी, आरटी सीटी स्कैन, पिईटी सीटी स्कैन, एक जनरल वार्ड, डे केयर, फार्मेसी, प्राइवेट केबिन जैसी कई सुविधाएं दी गई हैं।

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