इंदौर जिले में वर्तमान में 4840 लोकेशनों पर दस्तावेज का पंजीयन हो रहा है और आगामी गाइडलाइन में इनकी संख्या को कम करने की कवायद की जा रही है। इसके लिए आसपास की 533 लोकेशनों को मर्ज कर एक बनाया जाएगा। इनमें तीन से चार कॉलोनियों की एक लोकेशन बनेगी। इससे जिले में करीब 350 लोकेशन कम हो जाएगी।
रजिस्ट्री में सुविधा के लिए पंजीयन विभाग लोकेशनों की संख्या सीमित कर रहा है, ताकि ऑनलाइन दरें उठाने के दौरान राजस्व का नुकसान नहीं हो। अभी अलग-अलग लोकेशन होने से कई बार पास की कॉलोनी की लोकेशन पर दस्तावेज पंजीकृत हो जाते हैं। इससे बाद में परेशानी होती है और कई बार राजस्व भी कम मिलता है।
अलग-अलग लोकेशनों को एक किया जा रहा है
संपदा 2.0 पर रजिस्ट्री के दौरान लोकेशन ऑनलाइन अपलोड होती है, ऐसे में एक ही क्षेत्र की दरें अलग-अलग होने से परेशानी होती है। इससे बचने के लिए आसपास की कॉलोनियों की अलग-अलग लोकेशनों को एक किया जा रहा है। इस बार पंजीयन विभाग करीब 533 लोकेशन को मर्ज करेगा।
तीन से चार कॉलोनियों जोड़कर एक लोकेशन बनाई जाएगी और औसत अनुसार एक दर तय होगी। वरिष्ठ पंजीयक अमरेश नायडू का कहना है कि इस बार भी बड़ी संख्या में लोकेशनों को मर्ज किया जा रहा है। जिले में लोकेशन की संख्या आने वाले समय में तीन हजार करने की योजना है। बीते वित्तीय वर्ष में भी कुछ लोकेशनों को मर्ज किया गया था और इस बार भी किया जा रहा है।
10 से 170 प्रतिशत बढ़ोतरी
2026–27 के लिए तैयार प्रारंभिक प्रस्ताव के अनुसार जिले में तीन हजार लोकेशनों पर कलेक्टर गाइडलाइन बढ़ सकती है। इन कॉलोनियों में 10 से 170 प्रतिशत गाइडलाइन बढ़ोतरी की योजना है। सबसे अधिक बढ़ोतरी शहर के बाहरी क्षेत्रों और प्रमुख मार्गों के आसपास प्रस्तावित है।
सड़कों से प्रभावित गांवों की बढ़ेंगी दरें
इंदौर के आसपास तैयार हो रही सड़कों से प्रभावित होने वाले गांवों की बीते साल गाइडलाइन 200 प्रतिशत तक बढ़ाई गई थी। इस बार ग्रीन फील्ड सड़क से प्रभावित 20 गांवों की गाइडलाइन में बढ़ोतरी की जाएगी। यहां 20 से 70 प्रतिशत बढ़ोतरी की संभावना है।
वहीं बीते साल पूर्वी, पश्चिमी रिंग रोड और इकोनामिक कॉरिडोर में आने वाले गांवों की गाइडलाइन बढ़ी थी, इस बार इनमें अधिक वृद्धि नहीं होगी, लेकिन इन गांवों के आसपास के गांवों की गाइडलाइन बढ़ाई जाएगी। क्योंकि यहां पर दरें बहुत कम रह गई हैं।

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