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अब पूर्व सीजेआई सुलझाएंगे यूएई वाला 500 करोड़ का विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए? यहां जानिए सबकुछFormer CJI to Now Resolve ₹500 Crore UAE Dispute: What Directives Did the Supreme Court Issue? Find Out Everything Here.

 

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के एक बड़े कारोबारी विवाद को सुलझाने के लिए सोमवार को बड़ा फैसला लिया। अदालत ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित (यू.यू ललित) को इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त किया है, ताकि दोनों पक्ष आपसी बातचीत से विवाद का समाधान निकाल सकें। यह मामला संयुक्त अरब अमीरात की निवेश एजेंसी रास अल खैमाह इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (राकिया) और हैदराबाद के उद्योगपति निम्मगड्डा प्रसाद के बीच लंबे समय से चल रहे आर्थिक विवाद से जुड़ा है।


इस पूरे मामले को ऐसे समझा जा सकता है कि दरअसल यह विवाद आंध्र प्रदेश में बंदरगाह और हवाई अड्डे के विकास के लिए शुरू किए गए एक संयुक्त प्रोजेक्ट ‘वैनपिक’ से जुड़ा है। यह परियोजना साल 2008 में शुरू हुई थी, लेकिन बाद में यह सफल नहीं हो पाई और इसके बाद दोनों पक्षों के बीच वित्तीय विवाद खड़ा हो गया।

राकिया ने पैसे गमन का लगाया है आरोपबढ़ता विवाद का बड़ा कारण है कि राकिया का दावा है कि उद्योगपति निम्मगड्डा प्रसाद ने राकिया के पूर्व सीईओ खातेर मसाद के साथ मिलकर परियोजना के लिए दिए गए करीब 12 करोड़ अमेरिकी डॉलर का गबन किया। दूसरी ओर इसी मामले में संयुक्त अरब अमीरात की अदालत ने पहले फैसला सुनाते हुए प्रसाद को लगभग 267.9 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 543 करोड़ रुपये मूलधन और ब्याज सहित लगभग 643 करोड़ रुपये) का भुगतान करने का आदेश दिया था, जिसके बाद अब राकिया भारत में इस फैसले को लागू करवाने की कोशिश कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ, अब ये समझिएसोमवार को इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान उद्योगपति प्रसाद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने अदालत को बताया कि प्रसाद पहले के निर्देश के अनुसार 125 करोड़ रुपये नकद जमा कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने तेलंगाना में स्थित 37 एकड़ जमीन के मूल दस्तावेज भी अदालत में जमा कर दिए हैं। वकील ने कहा कि इस जमीन पर कोई कर्ज या कानूनी विवाद नहीं है। प्रसाद की ओर से यह भी कहा गया कि वे विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने को तैयार हैं।हाइब्रिड तरीके से होगी मध्यस्थतासुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने निर्देश दिया कि मध्यस्थता ‘हाइब्रिड’ तरीके से कराई जा सकती है। इसका मतलब है कि कुछ लोग सीधे मौजूद रहेंगे, जबकि राकिया के प्रतिनिधि वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए भी शामिल हो सकते हैं। अदालत ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए यह व्यवस्था करने को कहा है। ऐसे में अब उम्मीद की जा रही है कि मध्यस्थता के जरिए इस लंबे समय से चल रहे विवाद का समाधान जल्दी निकल सकता है।

दोनों पक्ष मध्यस्थता के लिए तैयारउधर, राकिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने भी अदालत को बताया कि विदेशी कंपनी विवाद को सुलझाने के लिए समयबद्ध मध्यस्थता के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने यह शर्त रखी कि प्रसाद की संपत्तियों की मौजूदा स्थिति बनी रहनी चाहिए और मध्यस्थता पूरी होने तक इसमें कोई तीसरा पक्ष शामिल न हो। ऐसे में दोनों पक्षों की सहमति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश यू.यू. ललित को मध्यस्थ नियुक्त कर दिया।

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