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ईरान युद्ध के बीच रूस पर मेहरबान हुए ट्रंप, 30 दिन तक सभी देशों को दी रूसी तेल खरीदने की छूट Amidst the Iran conflict, Trump shows leniency toward Russia, granting all nations a 30-day exemption to purchase Russian oil

.अमेरिका (United States Of America) और इज़रायल (Israel) का ईरान (Iran) के खिलाफ चल रहे युद्ध का आज 14वां दिन है। युद्ध कब खत्म होगा, फिलहाल इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। मिडिल ईस्ट में युद्ध (Middle East War) की वजह से हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन इसका असर दुनियाभर में देखने को मिल रहा है। दुनियाभर का करीब 20-30% तेल होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से होकर गुज़रता है, जिस पर ईरान का कंट्रोल है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है जिससे दुनियाभर में तेल का संकट पैदा हो गया है। इसी बीच अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बड़ा फैसला लिया है।



रूस पर मेहरबान हुए ट्रंप

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच ट्रंप अचानक रूस (Russia) पर मेहरबान हो गए हैं। ऐसे में ट्रंप ने रूस पर लगे प्रतिबंधों को हटाते हुए 30 दिन का नया सामान्य लाइसेंस जारी किया है। इसके तहत सभी देश रूस से तेल खरीद सकेंगे। यह लाइसेंस 12 मार्च तक जहाजों पर लोड किए गए रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की डिलीवरी और बिक्री तक वैध रहेगा जो समुद्रों में फंसे हुए हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही ट्रंप प्रशासन ने भारत को भी 30 दिन तक बिना किसी प्रतिबंध के रूस से तेल खरीदने की अनुमति दी थी। हालांकि इसके जवाब में भारत (India) ने साफ कर दिया था कि उन्हें रूस से तेल खरीदने के लिए किसी की अनुमति की ज़रूरत नहीं है।

वैश्विक संकट को देखते हुए लिया गया फैसला

ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध की वजह से पैदा हुए वैश्विक संकट को देखते हुए अमेरिका ने यह फैसला लिया। इस युद्ध की वजह से तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है और इसके 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका है जो चिंताजनक है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन ने रूस के तेल की खरीद पर लगे प्रतिबंधों को 30 दिन के लिए हटाने का फैसला लिया है लेते हुए इसके लिए लाइसेंस जारी किया है, जिससे तेल के संकट से राहत मिल सके और बढ़ती कीमत को काबू में लाया जा सके।

रूस को होगा फायदा

अमेरिका के इस फैसले से रूस को फायदा होगा और ज़्यादा से ज़्यादा देश उसका तेल और पेट्रोलियम उत्पादों खरीदेंगे। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि इससे रूस को ज़्यादा फायदा नहीं होगा।

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