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तलाक-ए-हसन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, पति की गैर-हाजिरी और गंभीर आरोपों पर अंतरिम राहतSupreme Court stays Talaq-e-Hasan, grants interim relief in case of husband's absence and serious allegations

 

सुप्रीम कोर्ट ने एक मुस्लिम पति द्वारा अपनी अशिक्षित पत्नी को दिए गए तलाक-ए-हसन की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि पत्नी ने आरोप लगाया है कि उसके हस्ताक्षर खाली कागज़ पर कराए गए और नोटिस के बावजूद पति पेश नहीं हुआ। चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत तलाक-ए-हसन को अवैध घोषित नहीं कर रही है; परंतु इस मामले में गंभीर आरोप और पति की गैर-हाजिरी को देखते हुए रोक आवश्यक है।


चूंकि पति आरोपों का खंडन करने के लिए सामने नहीं आया है, इसलिए उसके द्वारा कथित रूप से दिए गए तलाक-ए-हसन के संचालन पर रोक लगाई जाती है। जब तक पति आकर यह न दिखाए कि वैध तलाक दिया गया है, तब तक पक्षकारों को विधिवत विवाहित दंपति माना जाएगा। संबंधित SHO पति का पता लगाकर उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करे।” अदालत ने नोट किया कि याचिकाकर्ता एक अशिक्षित गृहिणी है और 2021 में विवाह हुआ था। उसे “एकतरफा, गैर-न्यायिक तलाक-ए-हसन” का शिकार बताया गया है। नोटिस की सेवा पूरी होने के बावजूद पति पेश नहीं हुआ।

 तलाक-ए-अहसन को चुनौती वाली याचिका पर भी नोटिस खंडपीठ ने एक अन्य याचिका पर भी नोटिस जारी किया, जिसमें तलाक-ए-अहसन को संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी गई है। इस मामले में पति द्वारा ईमेल, व्हाट्सऐप और रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से तलाक दिए जाने का आरोप है। याचिकाकर्ता ने विधायी कार्रवाई होने तक दिशानिर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि “अवैध तलाक, प्रतिशोधात्मक आपराधिक कार्रवाई और पुलिस पक्षपात” से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को राहत मिल सके। हीना मामले में मध्यस्थता का आदेश मुख्य मामले (बेनेज़ीर हीना) में अदालत को बताया गया कि पिछले आदेश के बाद भी तलाक देने की पुनः कोशिश की गई, जिसके खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई है।

 दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने विवाद को मध्यस्थता के लिए भेज दिया। अदालत ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस कुरियन जोसेफ को एकमात्र वरिष्ठ मध्यस्थ नियुक्त किया और चार सप्ताह में समाधान का प्रयास करने को कहा। मध्यस्थता शुरू होने के मद्देनज़र पति द्वारा कथित रूप से दिए गए पूर्व तलाक फिलहाल स्थगित (abeyance) रहेंगे। वर्चुअल माध्यम से तलाक पर रोक से इनकार याचिकाकर्ता की ओर से व्हाट्सऐप/ईमेल जैसे वर्चुअल माध्यमों से तलाक पर अंतरिम रोक लगाने का अनुरोध किया गया, लेकिन पीठ ने इस स्तर पर ऐसा आदेश देने से इनकार किया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह संवेदनशील और जटिल मुद्दा है, जिसमें मानवीय भावनाएं जुड़ी हैं, इसलिए दोनों पक्षों को सुनकर ही उपयुक्त आदेश पारित किया जाएगा। मामले की आगे की सुनवाई जारी रहेगी।

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