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मालवा-निमाड़ में खाकी पर दाग...हर जिले में पुलिसकर्मी जांच के घेरे में, इंदौर में क्रिप्टो ट्रेडर से लूट ने खोली परतेंStains on the khaki uniform in Malwa-Nimar…Policemen in every district are under scrutiny, the robbery of a crypto trader in Indore reveals the layers.

 

इंदौर में क्रिप्टो ट्रेडर से लूट के सनसनीखेज मामले ने एक बार फिर खाकी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एमआइजी थाने में पदस्थ और डीसीपी कार्यालय से जुड़े दो सिपाहियों द्वारा बदमाशों के साथ मिलकर युवक को अगवा कर नकदी और डिजिटल करेंसी लूटने की घटना सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि मालवा-निमाड़ अंचल में कानून के रखवालों पर ही गंभीर आरोप लगते रहे हैं।


देवास, रतलाम, मंदसौर, बुरहानपुर और नीमच तक ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां खाकी वर्दी पर दाग लगे हैं।

देवास में 6 से अधिक पुलिसकर्मियों पर विभिन्न प्रकरण,जांच लंबित

जिले में छह से अधिक पुलिसकर्मियों पर विभिन्न प्रकरण और जांच लंबित हैं, जिनमें अधिकांश मामले दहेज प्रताड़ना से जुड़े बताए जा रहे हैं। एसपी पुनीत गहलोत के अनुसार जिन कर्मचारियों पर गंभीर प्रकरण लंबित हैं, उन्हें थानों में पदस्थ नहीं किया गया है।

करीब एक दर्जन पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच चल रही है, जिनमें कई आरक्षक और प्रधान आरक्षक बिना बताए छुट्टी पर चले जाने जैसे मामलों में घिरे हैं। हाल ही में सतवास थाने में मौत के मामले में कस्टोडियल डेथ की जांच भी जारी है।

नीमच में तस्करी, फर्जी एनकाउंटर और झूठे प्रकरणों का लंबा इतिहास

सीमावर्ती जिला नीमच लंबे समय से मादक पदार्थ तस्करी के लिए कुख्यात रहा है। यहां दर्जनभर से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारी जांच, एफआरुआर और न्यायालयीन प्रकरणों का सामना कर रहे हैं। फर्जी एनकाउंटर, दुर्घटना में मौत के झूठे दावे और तस्करों से सांठगांठ के कई मामले सामने आए हैं।

बंशी गुर्जर फर्जी एनकाउंटर प्रकरण में सीबीआई तक को हस्तक्षेप करना पड़ा था। वहीं एक व्यापारी के बेटे को झूठे मादक पदार्थ मामले में फंसाने के आरोप में पांच पुलिसकर्मी बर्खास्त किए जा चुके हैं।

मंदसौर में एनडीपीएस मामलों में भ्रष्टाचार

मंदसौर जिले में अधिकांश विभागीय जांचें एनडीपीएस एक्ट से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चल रही हैं। करीब दर्जनभर पुलिस अधिकारी और कर्मचारी ऐसे हैं, जिन पर प्रदेश से बाहर उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक न्यायालयीन प्रकरण चल रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि कुछ अधिकारियों को जांच लंबित रहने के बावजूद पदोन्नति मिलती रही और वे एसआई से टीआइ और एसडीओपी तक बन गए।

बुरहानपुर में दुष्कर्म केस और विभागीय गड़बड़ियों के आरोप

बुरहानपुर में रिश्वत लेते हुए कोई पुलिसकर्मी ट्रैप नहीं हुआ, लेकिन सब इंस्पेक्टर पर जबलपुर की महिला द्वारा दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया गया था, जिसमें वे बाद में दोषमुक्त घोषित हुए।

इसके अलावा एसपी कार्यालय में 
पदस्थ दो बाबुओं पर मेंटेनेंस राशि में गड़बड़ी के आरोपों की विभागीय जांच चल रही है। एक एएसआई के शराब पीकर ड्यूटी करने के मामले में भी कार्रवाई जारी है।

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