• रवि उपाध्याय
तेलंगाना में हाल ही में हुए नगर निकायों चुनावों में वोट के लिए मतदाताओं को रिश्वत देने और चुनाव हारने के बाद रिश्वत में बांटी गई सामग्री वापस मांगने का एक रोचक मामला सामने आया है। वहां कांग्रेस प्रत्याशी ने वोट कबाड़ने के लिए अपने वार्ड के प्रत्येक घर में एक एक प्रेशर कुकर और ढाई ढाई हजार रुपए के लिफाफे बांटे। जब रिजल्ट आया तो वोटर्स ने उन्हीं की सीटी बजा दी। जिस कांग्रेस कैंडिडेट ने प्रेशर कुकर और नोट बांटे थे, प्रेशर कुकर में उन्हीं की दाल नहीं गली। वह चुनाव हार गए।
पराजय से नेताजी बहुत दुःखी हुए। वे गुस्से में मतदाताओं के घरों पर जा धमके और प्रेशर कुकर, कैश वापस मांगने लगे। महिलाओं ने प्रेशर कुकर उनके मुंह पर फेंक दिए और कहा कि उन्होंने वोट के लिए रिश्वत नहीं मांगी थी। अब अपना प्रेशर कुकर उठाओ और चलते बनो आगे से इधर का रुख कभी मत करना।नेताजी प्रेशर कुकर समेट अपना सा मुंह लेकर वहां से चलते बने।
यह घटना तेलंगाना जिले के भद्राद्री कोठागुडेम जिले के अश्वरावपेटा नगर पालिका के वार्ड नंबर 10 की है। वहां सड़क पर धड़ाधड़ प्रेशर कुकर फेंके जाने लगे। वहां के ईमानदार मतदाताओं ने पराजित प्रत्याशी के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। तब पुलिस भी वहां जा पहुंची और स्थिति का जायजा लेकर चुपचाप चलती बनीं। क्योंकि मामला सत्तारूढ़ पार्टी के प्रत्याशी का था।
बता दें कि चुनाव के दौरान आचार संहिता लागू रहती है और इस दौरान मतदाताओं को वोट के लिए रिश्वत या घूस देना गुनाह है। पर यह सब चलता है। कानून और पुलिस अपना मुंह फेर लेती है। यह चुनावी रिवायत है। इस हाथ ले उस हाथ दे। दस नम्बर वार्ड के दस नंबरी कैंडिडेट को वोटर्स ने उन्हीं को आईना दिखा दिया।
पिछले महीने तेलंगाना के आदिलाबाद में पुलिस ने एक गोदाम पर छापा मार कर अवैध रूप से रखे गए 36000 प्रेशर कुकर को जब्त कर जांच शुरू की थी। बाद में पता चला कि रिश्वत देने के आरोपी नेताजी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
दशकों पहले ऐसा ही एक रोचक मामला संयुक्त मध्यप्रदेश के बस्तर जिले में (अब छत्तीसगढ़ राज्य का एक जिला है ) हुए नगरीय निकाय चुनाव के दौरान एक वार्ड में सामने आया था। उन दिनों यह खबर मुम्बई से प्रकाशित हिंदी वीकली ब्लिट्ज में प्रकाशित की गई थी।

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