सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच यमन में अलगाववादी समूहों को समर्थन देने के मुद्दे पर शुरू हुआ विवाद फ़िलहाल थमता दिख रहा है.
हालाँकि, विश्लेषकों का कहना है कि दोनों देशों के बीच तनाव में यह कमी अस्थायी हो सकती है और भविष्य में किसी अन्य मुद्दे पर यह फिर से उभर सकता है.
हाल ही में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में एक हवाई हमला किया, जिसमें यूएई से आए कथित हथियारों और सैन्य वाहनों को निशाना बनाया गया.
इसके बाद सऊदी अरब ने मांग की थी कि यूएई यमन सरकार के अनुरोध पर अमल करते हुए 24 घंटे के भीतर अपनी सेना वापस बुलाए.विश्लेषकों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सऊदी अरब और यूएई के रणनीतिक और आर्थिक हित एक-दूसरे से किसी हद तक अलग हो गए हैं.
यही वजह है कि मध्य-पूर्व के इन दो महत्वपूर्ण देशों के बीच की 'अघोषित प्रतिस्पर्धा' अब खुलकर सामने आ रही है.

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