जिला अस्पताल में मरीजों का भोजन निगल रही ठेका एजेंसी
भोपाल के सबसे बड़े जयप्रकाश अस्पताल (जेपी) में भर्ती मरीजों को दिए जाने वाले दैनिक आहार के नाम पर सरकार और मरीजों के साथ धोखा हो रहा है। अधिकारियों की अनदेखी, मिलीभगत और लापरवाही के चलते मरीजों का दैनिक आहार (डाइट) ठेका लेने वाली एजेंसी द्वारा अपर्याप्त, गुणवत्ताहीन और बेस्वाद भोजन के रूप में परोसा जा रहा है। वहीं, उन मरीजों के लिए भी भोजन का भुगतान एजेंसी को किया जा रहा है जो सरकारी भोजन नहीं लेते ।
मरीजों का दर्द
मरीज सोनू द्विवेदी ने बताया. कि भोजन में कच्ची या जली हुई रोटियां, चावल में सिर्फ पानी, पतली पत्तागोभी की सब्जी परोसी जाती है. खाना बिल्कुल भी खाने लायक नहीं है। पांच दिनों में केवल एक बार भोजन लिया. जिसके पास बर्तन नहीं, उसे भोजन नहीं दिया जाता.
बर्तन नहीं तो भोजन नहीं
ठेका एजेंसी द्वारा मरीजों को बर्तन या चाय का कप नहीं दिया जाता। बर्तन न होने पर भोजन भी नहीं दिया जाता। एजेंसी की प्रबंधक श्रीमती मुमताज का कहना है कि मरीज थाली चुरा ले जाते हैं, इसलिए बर्तन नहीं दिए जाते। वहीं, मरीज भोजन लेने से मना कर देते हैं
सरकारी खाना बिल्कुल अच्छा नहीं
मरीज सावून बाई बताती है. कि बची-खुची और जली हुई रोटियां, मटर और मूली की सब्जी मैंने कभी नहीं खाई, जो वहां मिलती है। सुबह आधा गिलास से कम दूध मिलता है, जबकि हास्पिटल को पूरा देना चाहिए। सलाद के नाम पर खीरा-ककड़ी के कुछ टुकड़े मिलते हैं इनका कहना है यदि ठेका एजेंसी मरीजों के आहार में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी कर रही है, तो उसका टेंडर निरस्त कर नए सिरे से टेंडर बुलवाया जाएगा। वार्ड में जाकर निरीक्षण कर इसकी जांच की जाएगी।
मरीजों को प्रतिदिन सेजु (माप के अनुसार) भोजन दिया जाता है। हमारे पास भोजन के लिए सामग्री है, लेकिन छुट्टी के दिनों में मरीज भोजन लेकर घर चले जाते हैं, इसलिए खाली भोजन दिया जाता है। मरीज अपने ही बर्तन में भोजन लेना पसंद करते हैं।” मुमताज खान, जेपी अस्पताल प्रभारी, रूपा इंटरप्राइजेज, कोलकाता (ठेका एजेंसी) जेपी अस्पताल में मरीजों के लिए प्रावधानित भोजन
ठेका एजेंसी ने कम दर पर लिया ठेका मरीजों के आहार (डाइट) का ठेका 1 जनवरी 2024 को कोलकाता की एजेंसी रूपा इंटरप्राइजेज ने तीन साल के लिए लिया है। प्रति मरीज, प्रतिदिन की सरकारी दर 98 रुपये थी, लेकिन एजेंसी ने 38 रुपये कम, यानी 60 रुपये प्रति दिन के हिसाब से ठेका लिया है। हालांकि भोजन की खराब गुणवत्ता और बर्तन न होने के कारण आधे से अधिक मरीज यह भोजन नहीं लेते। बावजूद इसके भुगतान भर्ती मरीजों की संख्या के आधार पर किया जाता है।

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