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मणिकर्णिका घाट पर सदियों से जल रही है दिव्य अग्नि, जानिए क्या है कभी न बुझने वाली इस आग का रहस्य?A divine fire has been burning at Manikarnika Ghat for centuries. What is the secret behind this never-extinguishing flame?

 

 मणिकर्णिका घाट एक ऐसा श्मशान घाट है जहां पर 24 घंटे चिताएं जलती हैं. ऐसी मान्यता है कि, इस घाट पर अंतिम संस्कार से व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसी वजह से काशी को मोक्ष की नगरी के नाम से भी जानते हैं. मणिकर्णिका घाट पर दिन-रात हमेशा चिताओं की अग्नि जलती रहती है. मणिकर्णिका घाट को लेकर एक रहस्य यह है कि, यहां पर एक अग्नि सदियों से जल रही है जो कभी ठंडी नहीं होती है.


स्वयं भगवान शिव ने प्रज्वलित की थी ‘दिव्य अग्नि’?

मणिकर्णिका घाट पर होने वाले अंतिम संस्कार के लिए आग इसी दिव्य अग्नि के पवित्र स्रोत से ली जाती है. आखिर मणिकर्णिका घाट पर सदियों से जल रही इस अग्नि का क्या रहस्य है? बता दें कि, हिंदू पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, लोग मानते हैं कि, मणिकर्णिका घाट पर जल रही इस अक्षय दीप या अखंड ज्योति को स्वयं भगवान शिव ने प्रज्वलित किया था. यह दिव्य लौ कभी शांत नहीं होती है चलिए इसका रहस्य जानते हैं.

क्या है पवित्र ज्योति का रहस्य?

मणिकर्णिका घाट पर इस दिव्य अग्नि के जलते रहने के पीछे माता पार्वती का श्राप माना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती की मणि कुंड में गिर गई थी. जब काफी खोजने के बाद यह नहीं मिली तो माता पार्वती ने यह श्राप दिया था कि इस घाट हमेशा चिता की अग्नि जलती रहेगी. माता पार्वती ने यह श्राप दिया था कि इस घाट पर चिता की अग्नि कभी नहीं बुझेगी. तभी से यहां पर यह अग्नि जल रही है और दाह संस्कार का सिलसिला जारी रहता है.

मणिकर्णिका घाट का महत्व

मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार से आत्मा को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसी मान्यता के कारण मणिकर्णिका घाट पर लोग दूर-दूर से परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए आते हैं. मणिकर्णिका घाट के नाम को लेकर भी एक पौराणिक कथा है. माता पार्वती की कान की बाली ‘मणि’ (आभूषण) और ‘कर्णिका’ (कान) यहां खो गई थी. जिसके कारण इस घाट का नाम मणिकर्णिका घाट पड़ा.

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