वियतनाम के जंगलों में छिपी 'सन डूंग गुफा' (Son Doong Cave) कुदरत का एक ऐसा करिश्मा है, जिसे देखकर विज्ञान और कल्पना की सीमाएं धुंधली पड़ जाती हैं। यह कोई साधारण गुफा नहीं, बल्कि पाताल में बसा एक पूरा साम्राज्य है, जहां धरती के अपने नियम चलते हैं।
कैसे हुई खोज?
वियतनाम के 'फोंगन्हा-के बांग नेशनल पार्क' में स्थित यह गुफा लाखों वर्षों से इंसानी नजरों से छिपी थी। इसकी कहानी किसी फिल्म से कम रोमांचक नहीं है:
1991 की खोज: एक स्थानीय किसान 'हो खान' जंगल में बारिश से बचने के लिए जगह ढूंढ रहे थे, तभी उन्हें एक विशाल द्वार से तेज हवा और पानी की आवाज सुनाई दी। डर के मारे वह वापस लौट आए।
2009 का वैज्ञानिक सर्वे: करीब 18 साल बाद, ब्रिटिश गुफा शोधकर्ताओं की एक टीम ने 'हो खान' की मदद से इसे फिर से खोजा और दुनिया को बताया कि यह पृथ्वी की सबसे विशाल प्राकृतिक गुफा है।
विशालता ऐसी कि समा जाए 40 मंजिला इमारत
सन डूंग की विशालता का अंदाजा आप इन आंकड़ों से लगा सकते हैं:
लंबाई और चौड़ाई: यह गुफा 9 किलोमीटर से अधिक लंबी और 150 मीटर चौड़ी है।
आसमान छूती छत: कई जगहों पर इसकी ऊंचाई 200 मीटर (650 फीट) से ज्यादा है। इसका मतलब है कि न्यूयॉर्क की गगनचुंबी इमारतें या एक पूरा बोइंग 747 विमान इसके अंदर आसानी से समा सकता है।
गुफा के भीतर बादल और जंगल
सन डूंग केवल पत्थरों का ढांचा नहीं है, इसके भीतर एक जीवित पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) धड़कता है।
खुद का मौसम: गुफा इतनी बड़ी है कि इसके अंदर तापमान के अंतर के कारण बादल बनते हैं और कोहरा छाया रहता है।
पाताल में जंगल: गुफा की छत जहां से ढह गई है, वहां से सूरज की रोशनी अंदर आती है। इस रोशनी ने गुफा के फर्श पर एक घना जंगल पैदा कर दिया है, जिसे वैज्ञानिक 'गार्डन ऑफ एडम' कहते हैं। यहां बंदर, उड़ने वाली लोमड़ी और दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं।
अदृश्य नदी: गुफा के भीतर एक विशाल और तेज बहाव वाली नदी बहती है, जिसकी गूंज पूरी गुफा में सुनाई देती है।
करोड़ों साल पुराना भूगर्भिक खजाना
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह गुफा 20 से 30 लाख साल पुरानी है। यहां चूना पत्थर की ऐसी संरचनाएं (Stalagmites) हैं जो 70 मीटर तक ऊंची हैं इन्हें दुनिया की सबसे ऊंची प्राकृतिक शैल संरचनाओं में गिना जाता है।
साल में केवल कुछ सौ लोगों को अनुमति
वियतनाम सरकार ने इस बेशकीमती धरोहर को बचाने के लिए इसे आम पर्यटन से दूर रखा है।
कड़े प्रतिबंध: यहां जाने के लिए विशेष परमिट की आवश्यकता होती है।
सीमित सीटें: पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए हर साल केवल 1,000 से कम पर्यटकों को ही यहां जाने की अनुमति दी जाती है।
कठिन चुनौती: यहां तक पहुंचना कोई पिकनिक नहीं है; इसमें दो दिन की लंबी ट्रेकिंग, गहरे पानी को पार करना और गुफा के अंदर कैंपिंग शामिल है।

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