भारतीय सेना हर साल 15 जनवरी को 'सेना दिवस' मनाती है। इस बार भारतीय सेना के 78वें स्थापना दिवस पर आज जयपुर आर्मी डे परेड आयोजित की जा रही है। इस कार्यक्रम में 2047 तक इंडियन आर्मी की मारक क्षमता कितनी होगी? इसकी रूपरेखा भी देखने को मिली। भारतीय सेना सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर हो रही है।
स्वदेशी हथियारों से बढ़ी मारक क्षमता
आज भारतीय सेना अर्जुन, टी-90 टैंक और के-9 वज्रा जैसे शक्तिशाली वाहनों के दम पर हर दुर्गम क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। अग्नि, ब्रह्मोस और आकाश जैसी मिसाइलों के बेड़े ने भारतीय सेना को वह ताकत दी है, जिससे न केवल सीमावर्ती बल्कि दूर स्थित लक्ष्यों को भी सटीक रूप से साधा जा सकता है। आधुनिक तकनीक के समावेश ने सेना को उन चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार कर दिया है, जो कुछ समय पहले तक असंभव मानी जाती थीं।दुश्मनों के लिए काल तीसरी पीढ़ी का टैंक भीष्म
सैन्य परेड में भीष्म (टैंक टी-90) की झलक देखने को मिली। तीसरी पीढ़ी का एडवांस टैंक भीष्म की खासियत ये है कि इसमें 125 एमएम बोर की गन से लैस है। ये टैंक भारतीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए तैनात रहता है। ये चार प्रकार के गोला दाग सकता है। वहीं टैंक पर लगी मैन गन से 5 किलोमीटर के दायरे में दुश्मनों के छक्के छुड़ा सकता है। रात के समय भी ये टैंक कारगर है। 46 टन वजन के भीष्म टैंक 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकता है।
बता दें, भारतीय सेना का लक्ष्य एक ऐसी 'फ्यूचर रेडी' फोर्स में तब्दील करना है, जो तकनीक से लैस, आत्मनिर्भर और किसी भी युद्ध को जीतने में सक्षम हो। इसके लिए अगस्त 2024 में थल सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी, जिसमें थल, जल और वायु सेना के बीच तालमेल बढ़ाकर 'ज्वाइंट ऑपरेशंस' को मजबूत करने पर रणनीति बनी थी।

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