भोपाल : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पेयजल की बदहाली और पर्यावरण के साथ हो रहे खिलवाड़ पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने इन तीन राज्यों की सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स पर लिया संज्ञान
मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने माना है कि लोगों के घरों तक पहुंचने वाला पानी अब पीने लायक नहीं बचा है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पुरानी और जर्जर पाइप लाइनों की वजह से सीवेज का गंदा पानी पेयजल में मिल रहा है।
डराने वाली हैं खबरें
इंदौर और भोपाल में खौफनाक मंजर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और मिनी मुंबई कहे जाने वाले इंदौर से डराने वाली खबरें हैं। इंदौर में गंदे पानी के सेवन से मौतें होने का हवाला दिया गया है, वहीं भोपाल के कई इलाकों में 'ई-कोलाई' जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल के आदमपुर और हरिपुरा जैसे क्षेत्रों में भूजल पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है, जिससे लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं।
काटे जा रहे हैं पेड़
एक तरफ पानी में जहर घुल रहा है, तो दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में विकास के नाम पर हरियाली का गला घोंटा जा रहा है। एनजीटी ने संज्ञान लिया है कि सड़कों, रेलवे और कोयला खदानों के लिए एमपी में करीब 15 लाख पुराने पेड़ों को काटा जा चुका है या काटने की तैयारी है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और विदिशा जैसे शहरों में इस भारी कटाई के कारण हवा (AQI) भी अब जहरीली होने लगी है।सरकार से जवाब तलब एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ. ए. सेंथिल वेल ने इस मामले को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और जल प्रदूषण अधिनियम का गंभीर उल्लंघन माना है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट कर दिया है कि नागरिकों को सुरक्षित पानी देना सरकार की जिम्मेदारी है और इस लापरवाही पर जवाबदेही तय की जाएगी।

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