दीप भांड
मनहूस,घमंडी,जल्लाद,लाचार,रीलबाज सरकार...
MP "गजब"है और "इंदौर"तो "अजब गजब" है
जहरीली शराब
से मौत तो सुना था इन्होंने तो "जहरीले पानी" से लोगों को मार डाला..."बड़े तेजस्वी लोग है ये"...
और ये पहली बार नहीं है जब आपकी अनदेखी के कारण लोगों की जान गई हो। एक बार की त्रुटि,त्रुटि कहलाती है बार बार की गई त्रुटि अपराध की श्रेणी में आती है और आप अपराधी है।
इंदौर का एक और कीर्तिमान यकीन मानिए इससे कही कुछ नहीं बदलने वाला, 4 दिन में फिर वही स्वागत मंच,फिर वही कार्यक्रमों में सहभागिता ,फिर वही स्वयं का स्वागत सत्कार,फिर वही अपने आकाओ से सौजन्य से भेंट ...वहीं सोशल मीडिया रील की चमचमाहट,4 अलग अलग एंगल से शानदार फोटो और रील...
क्या मजबूरी है आपकी जो ये अफसर आपके सिर पर नंगा नाच कर रहे है और आप गूंगे की भांति मुंह में दही जमाए बैठे है...मंत्री जी आप तो साफ साफ कहते थे कि इन अफसरों की मालिश करने की जरूरत नहीं हैं तो फिर 13 मौत किसके जिम्मे है...
ये पूरा किया धरा भाजपा संगठन का है प्रदेश के मुखिया की इंदौर के मंत्री से नहीं जमती,मुखिया,मंत्री जी को शक्तिशाली नहीं देख सकते, मंत्री जी के हाथ काट दिए गए है। जिस मंत्री के एक फोन से अफसर कांप जाते थे आज वही अफसर मंत्री जी के सर पर बैठकर अलग अलग तरीकों से लोगों को मार रहे है...क्यों भाजपा संगठन,समन्वय समिति प्रदेश के मुखिया को निर्देशित नहीं करती कि आपकी इस लड़ाई इस भेदभाव का खामियाजा पूरा इंदौर भुगत रहा है बंद कीजिए ये सब आप प्रदेश के मुखिया है राजा नहीं...
बर्बाद होता संगठन,बर्बाद होती भाजपा,बर्बाद होता प्रदेश और इंदौर...
जिस इंदौर में थूकने पर चलान बन जाता था आज वहां जहरीला पानी पिला कर जान ली गई...किस काम की ऐसी प्रभावहीन सत्ता... हमने आपको अपने अपने मातृ संगठन कार्यालयों में दरी बिछाकर राष्ट्रभक्ति के गीत गाते देखा है, राष्ट्रसेवा का संकल्प लेते देखा है क्या इस दिन के लिए आपने गीत गाए थे, संकल्प लिए थे...अटल जी कहते थे ऐसी सत्ता को चिमटे से भी छुना पसंद नहीं करूंगा...अरे लात मारिये ऐसी कुर्सी को जो किसी निर्दोष प्यासे की लाश पर खड़ी हो या फिर मौन रहिए अपने करियर के लिए और इस पाप को अपने सर लीजिए पर याद रखिए ऊपर जाकर आपको भी एक दिन जवाब देना होगा,ये "तेरह"लोग आपसे सवाल पूछेंगे,इतिहास आपसे सवाल पूछेगा तैयार रहिए।
एक शास्त्री जी थे जिन्होंने एक रेल हादसे पर जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय रेलमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और एक आप है।
अरे मत दीजिए इस्तीफा पर अपनी ही पार्टी, अपने ही संगठन में आवाज तो उठाइए कि मेरी जनता के साथ ये ठीक नहीं हो रहा है।
लोगों का घुस्सा उबल रहा है...एक बात आप ध्यान रखे ये सब जो आप कर रहे है इसका मूल्यांकन यदि हम करे तो जीवन में कभी आपको वोट ना दे पर हमारी मजबूरी है कि हम "काफिर" है।

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