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मरते पौधे में जान फूंक देंगी 5 खाद, रॉकेट की तरह बढ़ेगा पौधा' फूल और फल में भी नहीं आएगी कमीThese 5 fertilizers will revive dying plants; your plants will grow like rockets, and there will be no shortage of flowers and fruits.

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होम गार्डनिंग का शौक रखने वाले लोग अक्सर इस बात से परेशान रहते हैं कि उनके पौधों की ग्रोथ रुक गई है या कलियां आने से पहले ही गिर रही हैं। दरअसल, मिट्टी में समय के साथ पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जिसे केवल पानी देकर पूरा नहीं किया जा सकता।जो मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाकर पौधों को जड़ से मजबूत बनाती हैं। चाहे बेल वाले पौधे हों या फूलों वाले गमले, इन खादों का सही मात्रा में इस्तेमाल जादुई असर दिखाता है। ठंडी और गर्म खाद दोनों का बैलेंस बताया गया है, ताकि मौसम और पौधे की जरूरत के हिसाब से सही खाद चुन सकें।


सीवीड फर्टिलाइजर

पौधों का टॉनिक, एक ठंडी खाद है जो पौधों को धीरे-धीरे पोषण देती है।इसमें सूक्ष्म पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। 1 लीटर पानी में 10 ग्राम सीवीड घोलें और सामान्य पानी की तरह पौधों में डाल दें। 6 महीने में केवल एक बार ही डालें। आप इसके दानों को सीधे मिट्टी में भी छिड़क सकते हैं।

डीएपी

इमरजेंसी इलाज यानी कि जब पौधा एकदम सूखने लगे या बहुत ज्यादा खराब हो जाए, तब इसका इस्तेमाल करें। जो तुरंत एनर्जी देने के लिए किया जाता है। इसे पानी में घोलकर जड़ों के पास डालें। यह फूलों वाले पौधों के लिए सबसे अच्छा काम करती है और जड़ों को तेजी से फैलाती है।

रॉक फास्फेट

डीएपी का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं तो रॉक फास्फेट एक बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प है। इसे सीधा मिट्टी में डाल सकते हैं या पानी में मिलाकर दे सकते हैं। इसे डालते समय गमले की मिट्टी में नमी होना अनिवार्य है, तभी यह सक्रिय रूप से काम करेगा।ध्यान रहे कि डालते समय मिट्टी में हल्की नमी होनी चाहिए।

एप्सम सॉल्ट

बेलों के लिए वरदान मैग्नीशियम सल्फेट से भरपूर एप्सम सॉल्ट पौधों की पत्तियों को हरा-भरा रखने और प्रकाश संश्लेषण बढ़ाने में मदद करता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए 1 लीटर पानी में 3 से 5 ग्राम एप्सम सॉल्ट घोलकर डालें। यह विशेष रूप से बेल वाले पौधों जैसे मनी प्लांट या सब्जियों के लिए बहुत फायदेमंद है।

सरसों की खली

फल-फूल के लिए सरसों की खली सबसे ताकतवर गर्म खाद है, जिसका असर 5 दिन में ही दिखने लगता है। 100 ग्राम खली को 1 लीटर पानी में 3 दिन तक भीगने दें। फिर इस घोल में 10 लीटर सादा पानी मिलाकर बहुत पतला कर लें और पौधों में डालें। इसे केवल सर्दियों या ठंडे मौसम में ही इस्तेमाल करें।

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