नई दिल्ली। भारत की शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन, संरक्षण और शोध को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने पांच नए उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) स्थापित करने की मंजूरी दी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 3 अक्टूबर 2026 को इसकी घोषणा की। इन केंद्रों में शास्त्रीय असमिया, बंगाली, मराठी, पाली और प्राकृत भाषाओं पर उच्च स्तरीय अकादमिक शोध किया जाएगा।
मंत्रालय के अनुसार, शास्त्रीय असमिया के लिए तेजपुर विश्वविद्यालय, असम, शास्त्रीय बंगाली के लिए विश्वभारती विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल, शास्त्रीय मराठी के लिए डेक्कन कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, पुणे, शास्त्रीय पाली के लिए केंद्रीय ओडिशा विश्वविद्यालय और शास्त्रीय प्राकृत के लिए केंद्रीय गुजरात विश्वविद्यालय में केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इन केंद्रों का उद्देश्य केवल भाषाओं का अध्ययन करना नहीं, बल्कि उनसे जुड़े प्राचीन साहित्य और ज्ञान परंपरा को संरक्षित करना, दस्तावेजों एवं साहित्य का डिजिटलीकरण करना तथा इस विरासत को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराना है। इसके साथ संबंधित राज्यों में उच्च शिक्षा और शोध का क्षेत्रीय अकादमिक ढांचा भी मजबूत होगा।
इन पांच भाषाओं को 3 अक्टूबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया था। अब नए केंद्र इनके व्यवस्थित अध्ययन और संरक्षण के लिए संस्थागत आधार उपलब्ध कराएंगे।

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