भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े को लेकर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बड़ी चिंता जताई है। एयर चीफ ने कहा कि नए लड़ाकू विमानों की डिलीवरी में हो रही देरी का असर वायुसेना की क्षमता पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षों तक वायुसेना को हर साल 36 से 40 नए लड़ाकू विमान शामिल करने की जरूरत है, ताकि मौजूदा कमी को रोका जा सके और स्क्वाड्रनों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ाई जा सके।
वर्तमान में वायुसेना के पास करीब 30 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत लक्ष्य 42 स्क्वाड्रन का है। एक लड़ाकू स्क्वाड्रन में सामान्य तौर पर करीब 18 से 20 विमान होते हैं। पुराने विमानों के चरणबद्ध तरीके से बाहर होने के कारण समय पर नए विमान शामिल करना और भी जरूरी हो गया है।
सबसे बड़ी उम्मीद स्वदेशी तेजस एमके-1ए से है। 2021 में 83 विमानों का अनुबंध हुआ था और पहली डिलीवरी मार्च 2024 तक होनी थी, लेकिन इसमें देरी हुई। एयर चीफ ने कहा कि इस बार देरी काफी लंबी है और इसका असर वायुसेना पर पड़ रहा है।
वायुसेना की योजना में तेजस एमके-1ए के साथ प्रस्तावित 114 राफेल वाले MRFA कार्यक्रम, अतिरिक्त सुखोई-30एमकेआई, तेजस एमके-2 और भविष्य के AMCA को शामिल करना है। एयर चीफ के मुताबिक, हर साल दो लड़ाकू स्क्वाड्रन के बराबर विमान शामिल करना जरूरी है।

Post a Comment